अनेक रहस्य छिपे हैं हाथ की लकीरों में

हाथ की लकीरों में अनेक लकीरें होती हैं, जिनमें स्वास्थ्य रेखा, भाग्यरेखा, विवाह रेखा, सूर्य या विद्यारेखा, हृदयरेखा, शनि-राहू ग्रह रेखा, मंगल रेखा, शुक्र रेखा और इसी तरह की कई रेखाएं होती हैं।
हथेली में जो रेखा जितनी अधिक सुस्पष्ट और गहरी होती है, उतनी ही अधिक प्रभावशाली हुआ करती है लेकिन जब यही रेखाएं कट जाती हैं अर्थात् कोई मोटी-पतली लकीर इन रेखाओं पर किसी भी स्थान पर काटती हुई आगे बढ़ जाती है तो उस रेखा के लिए बाध्य योग बन जाता है। इसे किसी भी रूप में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हाथ की सूर्य रेखा जातक को सूर्य के समान ख्याति दिलाने वाली होती है। वह विद्या के उच्चतम शिखर तक पहुंचा देती है। अगर सूर्य रेखा कटी हुई हो तो जातक अवश्य ही शिक्षा के मामले में असफल रहता है। सूर्य रेखा पर बने क्रास से जातक की आंखों की रोशनी भी कम हो सकती है या जीवन भर आंखों से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए जातक को श्रेष्ठ माणिक या गारनेट या सूर्य यंत्र धारण करना हितकर होता है।
हृदय रेखा पर यदि इस तरह का कहीं भी क्रास बना हो तो जातक का हृदय कमजोर होता है और उसे धड़कन की बीमारी होकर ही रहती है। दमा, कफ आदि की बीमारी का भी यह द्योतक होता है। हृदय रेखा पर अगर जंजीर नजर आये तो ऐसे जातक को भी जीवन में हृदय    संबंधी खतरा बना रहता है। हृदय रेखा पर जातक को अगर कोई क्रास नजर आये तो इस बाधा को दूर करने हेतु टायगरस्टोन, गारनेट या माणिक धारण करना चाहिए। ‘हृदयंत्र’ धारण करने वाले पर इस क्रास का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।
मस्तिष्क रेखा पर अगर कोई क्रास मौजूद हो तो जिस स्थान बिन्दु पर यह स्थित होता है, उस आयु में मस्तिष्क में चोट, मस्तिष्क संबंधी बीमारी का होना तय होता है। मस्तिष्क रेखा पर यदि जंजीर नजर आये तो ऐसे जातक प्रेम में असफल होते देखे गये हैं। मस्तिष्क रेखा पर जितनी छोटी-छोटी क्रास रेखाएं होंगी जीवन में उतने ही भावनात्मक रिश्ते जुड़ते और टूटते हैं। ऐसे जातक भुलक्कड़ स्वभाव के होते हैं। क्रास दोष मिटाने के लिए ऐसे जातकों को ‘षट्विहंगयंत्रÓ धारण करना चाहिए।
विवाह रेखा पर से कोई क्रास मस्तिष्क रेखा की ओर जाता है तो ऐसे जातक ने पत्नी को छोड़कर अन्य स्त्री से अपने शारीरिक संबंध जोड़े होते हैं। विवाह या संतान रेखा पर अगर कोई क्रास मौजूद हो तो ऐसे जातक के लिए यह अशुभ फलदायक होता है। विवाह रेखा पर कोई क्रास हो या कोई रेखा उसे काटती हुई आगे बढ़ गयी हो तो विवाह में बाधक योग समझना चाहिए। पत्नी या पति को वियोग सहना पड़ सकता है। संतान रेखा पर अगर इस तरह का क्रॉस मौजूद रहने पर जातक को संतान का वियोग सहन करना पड़ सकता है या गर्भपात हो सकता है। दांपत्य जीवन रेखा पर अगर इस तरह का कोई क्रास मौजूद हो तो शुक्र से संबंधित रत्नधारण करना चाहिए तथा दांपत्यरक्षक ‘यंत्रÓ धारण करना चाहिए।
जीवन रेखा पर अगर कोई क्रास मौजूद हो तो जिस स्थान पर क्रास हो, उस उम्र में जातक को जीवन का खतरा हो सकता है। यह क्रास जितना अधिक होगा, खतरा उतना ही अधिक होता है। यह क्रास बीमारी, दुर्घटना, अथवा जानलेवा हमले का द्योतक होता है। जीवन रेखा से कोई क्रास भाग्य रेखा, हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा को काटती हुई आगे बढ़ जाये तो ऐसे जातक का कम उम्र में ही बचना असंभव हो जाता है।
अगर दुहरा जीवन (रेखा डबल लाइफ लाइन) हथेली में मौजूद रहे तो समझना चाहिए कि जातक का जीवन बच तो जाएगा लेकिन मुसीबतें काफी आयेंगी। जीवन को बचाने हेतु शुद्ध पुखराज या टोपाज रत्न धारण करना या ‘महामृत्युंजय यंत्रÓ धारण करना श्रेयस्कर होता है।
शनि रेखा से अगर कोई रेखा सूर्य की ओर जा रही हो या जिसे Óशनि वलय’ भी कहा जाता है, किसी जातक के हाथ में मौजूद हो तो ऐसे जातक शनि से ग्रसित होते हैं और जीवन भर अनेक परेशानियों से घिरे रहते हैं। ऐसे जातक को शनि की शांति हेतु नाव के कील या काले घोड़े के नाल की अंगूठी बनाकर या ‘शनि यंत्र’ धारण करना चाहिए।
बुध रेखा पर अगर कोई क्रास बना हो तो ऐसे जातक का व्यापार अथवा लेखन, प्रकाशन का कार्य रूक-रूककर आगे बढ़ता है। क्रास जितना ज्यादा होगा, बाधक योग उतना ही अधिक होगा। ऐसे जातक को बुध से संबंधित रत्न, पन्ना अथवा ओमेक्स राशि के वजन के अनुसार धारण करना चाहिए या ‘बुध यंत्र’ को धारण करना चाहिए।
भाग्य रेखा पर अगर कोई क्रास हो या जंजीर हो तो भाग्य कई बार रूक-रूककर साथ देता है तथा जीवन में अनेक चढ़ाव उतार उत्पन्न होते हैं। किसी व्यक्ति के हाथ की लकीरों पर अगर इस तरह का क्रास भाग्य की लकीरों को काटता हो तो सूर्य से संबंधित रत्न या यंत्र धारण करना चाहिए।
गुरू पर्वत, राहु पर्वत आदि पर बने क्रास भी जातक के लिए अहितकर होते हैं। अपनी हथेली की रेखाओं से संबंधित सम्पूर्ण जानकारियों को अच्छे विद्वान से जानकर उनके द्वारा बताये गये उपायों को करना हितकर होता है। ——————- (उर्वशी)




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *