अपराध में तब्दील होता फैशन

फैशन आधुनिक युग की प्रमुख समस्या है। युगों से इसका प्रचलन चला आ रहा है। कोई भी देश स्वयं को फैशन से नहीं बचा पाया है। युवा वर्ग में फैशन का अधिक क्रेज है। यदि कहा जाये कि युवा वर्ग फैशन के पीछे पागल है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
युवा वर्ग में बढ़ता फैशन का क्रेज समाज के लिए खतरा बनता जा रहा है। हालांकि हमारा सम्पूर्ण समाज फैशन की ओर अग्रसर है परन्तु फैशन के जरिए बढ़ते अपराधों से अनजान है। आइए इस पर एक नजर डालें।
आज युवा वर्ग के लिए फैशन स्टेट्स सिंबल बन गया है। यदि आप फैशन से सरोबार होकर कॉलेज जाते हैं तो आप वाकई बैंक बैलेंस वाले माने जायेंगे अन्यथा आपकी ओर कोई ध्यान भी नहीं देगा, ऐसा मानना है युवा वर्ग का। कॉलेज में जाने वाले युवक एवं युवतियों को देखकर यह नहीं लगता कि वे कॉलेज में अध्ययन हेतु जा रहे हैं अपितु ऐसा लगता है जैसे कि वे रैम्प पर कैटवॉक कर रहे हों। उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व पर फैशन की ही छाप विद्यमान होती है।
दिल्ली स्थित सेंट स्टीफन कॉलेज से बी. एस. सी. कर चुकी शेफाली मित्तल का कहना है, Óयदि आप कॉलेज में साधारण कपड़े पहनें एवं बिना मेकअप के जाती हैं तो कोई आप से बात भी नहीं करेगा, यहां तक कि आप को जाहिल समझा जाएगा। क्लासरूम में आप अपनी बौद्धिक क्षमता पर टिक सकते हैं मगर ऑउट ऑफ क्लासरुम आप अपने को हीनभावना से ग्रस्त पायेंगे।
डिस्को में जाना, कैसिनो में खेलना या शराब पीना आज मामूली बातें हैं लेकिन इन सब में होता क्या है, मनोरंजन के नाम पर शोषण, चाहे वह दैहिक शोषण हो या फिर मानसिक शोषण! शोषण की सीमा कब बलात्कार या हत्या की सीमा पार कर जाये, किसी को नहीं पता। प्रतिदिन ऐसी ही न जाने कितनी खबरें प्रकाशित होती हैं, फिर भी युवतियां फैशन के कारण इन सबकी परवाह नहीं करती।
नाइट क्लब में जाने वाली युवतियां आपको स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लगेंगी। इन अप्सराओं में प्रतिस्पर्धा की तीव्र भावना होती है जिसके फलस्वरूप ये तुच्छ से तुच्छ फैशन को अपनाती हैं और अंग प्रदर्शन करने में जरा भी नहीं हिचकचाती हैं। कुछ ऐसा ही करते हैं युवक। कमीज न पहनना और तीव्र परफ्यूम लगाना, मात्र यौन आकर्षण हेतु किया जाता है। इन सबके परिणाम होते हैं-बलात्कार, बिन ब्याही मां, हत्या या फिर जीने के लिए जहरीला जीवन आदि।
‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।Ó यह कथन यहां पर सत्य सिद्ध नहीं होता और न ही यह बदलता फैशन मानव की आवश्यकता है बल्कि हवस का शिकंजा है जो महिलाओं का शोषण करने में सहायक है। अत: आवश्यकता है, ऐसे फैशन को त्यागने की, जो मानव को मानव के प्रति हिंसक बनाये और अनजाने में ही अपराध की दुनियां में सक्रिय बना दे। (उर्वशी)




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