अरेंज्ड मैरिज में आपका फोकस हो लड़के-लड़की की पसंद

’अरेंज्ड मैरिज‘ को लड़कियां और लड़के दोनों गंभीरता से लेते हैं क्योंकि ’अरेंज्ड‘ शब्द उन्हें यह महसूस कराता है कि उनके जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण निर्णय उनके द्वारा नहीं, उनके बड़ों के द्वारा लिया गया है यद्यपि उसमें उन्होंने हामी भरी है। अरेंज्ड मैरिज का अर्थ एक लड़की का एक लड़के से विवाह नहीं बल्कि एक लड़की का एक परिवार के साथ विवाह है।
अगर ध्यान से गौर किया जाए तो परिवार के साथ बंधने की यह प्रक्रिया उसी समय प्रारंभ हो जाती है जब सबसे पहले लड़की देखी जाती है। लड़की को देखना लड़के के लिए जरूरी होता है क्योंकि अरेंज्ड मैरिज है, इसलिए पूरा परिवार पहुंच जाता है और फिर लड़की का मुआयना होता है, सिर से लेकर पांव तक।
फिर जब परिवार घर वापिस लौटता है तो उस मुआयने का बयान होता है। बहन को लड़की थोड़ी काली लगी चाहे अपना भाई कितना ही काला क्यों न हो। ससुर को लड़की बोल्ड लगी, सास को लड़की की नौकरी पसंद नहीं, भांजी को लड़की की चाल पसंद नहीं आई, यानी एक लड़की को अपने चयन के लिए पूरे परिवार की कसौटी पर खरा उतरना आवश्यक होता है, तब जाकर विवाह के लिए परिवार राजी होता है।
समय के साथ इन कसौटियों में बदलाव आया है जैसे जन्मपत्राी और फोटो को ईमेल से पहले भिजवा दिया जाता है। अब लड़की के साथ-साथ घर के फर्नीचर, साज सज्जा, रहन-सहन को भी देखा जाता है जिसका लड़की-लड़के के भविष्य के जीवन से, उनकी खुशी से कोई संबंध नहीं होता।
हम परिवार को इस रिश्ते से अलग नहीं हटा सकते क्योंकि हमारी संस्कृति यही है कि परिवार महत्त्वपूर्ण है पर जब दो व्यक्ति विवाह जैसे महत्त्वपूर्ण बंधन में बंधने जा रहे हैं तो इस व्यर्थ के दिखावे की बजाय महत्त्वपूर्ण बातों पर फोकस करना चाहिए, वे महत्त्वपूर्ण बातें जो लड़के-लड़की के भविष्य पर असर डालती हैं। अरेंज्ड मैरिज में लड़के-लड़की कैसे निर्णय लें कि वाकई वे एक दूसरे के लिए बने हैं और उनका भविष्य सुखद हो, आपका फोकस इन बिन्दुओं पर होना चाहिए।
पारिवारिक मूल्य:- पारिवारिक मूल्य अगर न मिलते हों तो वैवाहिक जीवन के प्रारंभ में ही विवाद व झगड़े प्रारंभ हो जाते हैं। अगर लड़की के परिवार वाले सादगी में विश्वास करते हैं और लड़के के तड़क भड़क में, तो भी मुश्किल परिस्थितियां सामने आ जाती है।
लड़की को ऐसे माहौल में एडजस्ट होने में मुश्किल आती है क्योंकि वह जिस माहौल में पली बढ़ी है उसकी ’फेमिली वेल्यूस‘ अलग होती हैं। इसके लिए या तो लड़की रिश्ता जुड़ते वक्त पहले ही इस परिवर्तन के लिए खुद को तैयार कर ले या उस जगह रिश्ता जोड़े जहां उसकी ’फेमिली वेल्यूस‘ लड़के की‘ फेमिली वेल्यूस‘ से मेल खाती हों।
व्यक्तिगत शौक या आदतें:- अगर आप दोनों के व्यक्तिगत शौक या आदतें भिन्न हैं तो भी आपको मुश्किलें आ सकती हैं। अगर लड़की के परिवार में नान वेज, शराब, सिगरेट आदि को अच्छा नहीं माना जाता और लड़के को इन सब की आदतें हांे तो मुश्किल परिवार को नहीं बल्कि लड़की के लिए होती है।
जिन चीजों से वह घृणा करती है उन चीजों का शौक पति रखता हो तो आपस में अनबन हो जाती है और अगर दोनों ही एक दूसरे को बदलना चाहें तो उनके वैवाहिक जीवन के सुखद होने की आशा कम होती है। इसलिए इस मुद्दे पर लड़के लड़की को विवाह से पूर्व ही बात कर लेनी चाहिए।
करियर:- एक समय था जब विवाह से पूर्व सिर्फ लड़के के करियर के बारे में ही जानकारी ली जाती थी पर अब लड़की के लिए भी करियर बहुत महत्त्वपूर्ण हो गया है। अगर आप विवाह से पहले ही काम करती हैं और आप विवाह के बाद भी उसे गंभीरता से लेना चाहती हैं तो लड़के के परिवार व लड़के को यह स्पष्ट कर दें क्योंकि बहुत से परिवार लड़की से विवाह के पश्चात् नौकरी कराना पसंद नहीं करते क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर लड़की सारा दिन बाहर रहेगी तो पारिवारिक जिम्मेदारी कौन उठाएगा। घर के कामों का बोझ सास पर आ पड़ेगा।
जब ये बातें विवाह से पूर्व साफ नहीं होती तो बाद में झगड़ों की स्थिति आ जाती है। लड़की के लिए यह जानना बहुत आवश्यक है कि उसका नया परिवार उसको ’वर्किग वूमेन‘ के रूप में स्वीकार करेगा या नहीं। अगर नहीं या आपके लिए आपका कैरियर महत्त्वपूर्ण है तो आप ऐसे रिश्ते में न ही बंधें।
लाइफ स्टाइल:- लाइफ स्टाइल भी एक महत्त्वपूर्ण बिंदु है। आप पार्टियों, क्लब, डिस्को जाने के शौकीन हैं और लड़की का लाइफ स्टाइल ऐसा है कि वह इन जगहों पर जाना पसंद नहीं करती, वह समाज सेवा, साधारण जीवन व्यतीत करने में विश्वास करती है तो भी टकराव की स्थिति आ जाती है।
धर्म व आचार व्यवहार:- ’धर्म‘ भी अपनी जगह बहुत महत्ता रखता है और आपके धार्मिक विचार भी। अगर लड़की धार्मिक प्रवृत्ति की है, मन्दिर जाना, पूजा-पाठ करना उसके आचार व्यवहार में शामिल है और लड़के के परिवार वाले व लड़का नास्तिक हैं तो भी परेशानी आ सकती है। अगर दोनों परिवार अलग-अलग धर्मों से हैं तो लड़की को यह परेशानी आ जाती है कि वह किस धर्म का पालन करे, इसलिए इस बात पर भी गौर कर लेना चाहिए।
वास्तव में अरेंज्ड मैरिज में भी युवक युवतियों को सब कुछ मां बाप या बड़ों के हाथ में ही नहीं सौंप देना चाहिए। अपनी बुद्धि का भी प्रयोग करना चाहिए और यह निर्णय स्वयं करने का प्रयास करना चाहिए कि आपके लिए चयनित वर या वधू उपयुक्त है या नहीं। तभी आप लोग सुखद और शांत वैवाहिक जीवन जीने की आशा कर सकते हैं। (उर्वशी)

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