आध्यात्मिकता व प्रकृति का अनमोल संयोग है श्रावण माह

भारत में वैसे वर्ष भर के बारहों महीनों का अपना अपना महत्त्व है लेकिन श्रावण माह सभी अन्य महीनों से अलग व खास है। इस माह में प्रकृति के वास्तविक रूप को बखूबी देखा जा सकता है जो कहीं न कहीं मन व भावों को प्रफुल्लित व आह्लादित करने में सहायक है।
श्रावण माह में पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और सभी जीव-जन्तु खुशी मन से प्रकृति के साथ आनन्दित होते हैं और अपने को विकसित करने में स्वतन्त्रता का अनुभव करते है। इसका सटीक उदाहरण देखा जा सकता है जहां पर हमेशा शुष्क माहौल रहता था – श्रावण माह में वहां भी हरियाली हो जाती है। वही पशुओं की यदि बात हो यह माह उन्हें भी हरी हरी घास खाने का मौका देता है, इसी तरह हर जगह श्रावण के महीने में सब प्रकृति के असली रूप का अवलोकन करने का सौभाग्य पाते है।
श्रावण माह व समाज
 सामाजिक तौर पर यदि ध्यान दें तो पता चलता है कि यह माह हमारी बहन बेटियों के लिये काफी आनन्ददायक होता है। हर बहन बेटी सोचती है कि श्रावण माह में मायके चलूंगी और वहां सखियों के संग कजरी गाकर झूला झूलुंगी और मेले में घूमने का मौका मिलेगा। हालांकि बहन बेटियां हर माह में अपने मायके आने पर खुश होती हैं लेकिन श्रावण माह में तो यह खुशी कई गुना बढ़ जाती है क्योंकि यह माह काफी सुहावना व त्यौहार से भरा हुआ है। हमेशा ससुराल का काम, पति व बच्चों की देखभाल व घर की जिम्मेदारियों के आगे अपना सुख व मनोरंजन कोने रखकर लगी रहती हैं महिलायें और उन्हें श्रावण का इंतजार इसलिए रहता है कि मायके जाने पर बचपन फिर ताजा हो जाता है और जो दिमाग में कई तरह की बातें हैं। थोड़े दिन के लिये स्वच्छन्द भाव से जीने का मौका मिलता है। हालांकि ससुराल में कोई समस्या नहीं है लेकिन मायका तो मायका होता है।
श्रावण माह व आध्यात्मिकता
यदि श्रावण माह की बात हो और आध्यात्मिक पहलू की बात न हो तो यह बेमानी होगा क्योंकि श्रावण माह का अध्यात्म से गहरा लगाव है। इस माह में पूरे देश में भगवान शंकर के भक्तों के भक्ति की धूम रहती है और पूरे देश के शिवमंदिरों पर भक्तों की कतार देखते बनती है। शिव भक्त अपनी मनोकामना पूरा होने पर भगवान को कांवड से जल चढ़ाते हैं, व्रत रखते हैं, पूजा पाठ करते है,ं रूद्राभिषेक का विशेष आयोजन लोग अपने घरों व मंदिरों में कराते हैं। महिलायें भी श्रावण माह के हर सोमवार को पति की दीर्घायु के लिये व्रत करती है जबकि कुंवारी कन्याएं भी अच्छे पति पाने की लालसा में सोमवार का व्रत बडे ही श्रद्धा व भाव से करती हैं।
श्रावण माह व त्यौहार
श्रावण महीने में त्यौहार भी बड़े ही रोचक व अच्छे अच्छे मनाये जाते हैं। भाई बहन के प्रेम को मजबूत बनाने के लिये रक्षाबंधन त्यौहार प्राचीन काल से मनाया जा रहा है जो समाज के भागमभाग के माहौल में एक दूसरे को जोडऩे कीे कड़ी के रूप में काम करता है। पूर्वजों ने त्यौहार केवल आपसी प्रेम बनाने के लिये ही शुरू किया था लेकिन आज कुछ लोग रिश्तों
को भी दांव पर लगाने से बाज नहीं आते हैं।
श्रावण माह में कजरी के गीत जब कानों में पड़ते हैं तब मन मयूर बन कर प्रसन्न हो जाता है। आसमान में छाये बादल, उमड़ घुमड़ करते बादल, मोर का नाचना, वर्षा की फुहारें, हर जगह हरियाली, पक्षियों का कलरव समेत अन्य कई बातें श्रावण माह की उपस्थिति का अहसास कराकर मन को खुश बना देती हैं लेकिन हमारे आपसी मनमुटाव ने जिंदगी जीना दुश्वार कर दिया है। हमें चाहिये कि अपने सभी गिले शिकवे भुलाकर आपस में प्रेम व शांति से रहने की आदत डालें तभी सच्चे रूप में हमारे मन में हरियाली आयेगी और हम भी प्रसन्न रहेंगे। ——–(उर्वशी)

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