आपकी ‘न’ पति को आपसे दूर कर सकती है

रमन पलंग पर लेटा जग रहा था। दीपा रसोई का काम निपटाकर आयी। वह रमन से कुछ दूरी पर लेट गई थी।
रमन ने पास लेटी पत्नी के शरीर पर हाथ रखा।
‘क्या है?’ दीपा बोली।
‘इधर आओ न,’ रमन ने दीपा को अपनी तरफ खींचने को हाथ बढ़ाया।
‘नहीं, मैं पहले ही बहुत थक चुकी हूं। सो जाओ और मुझे भी सोने दो।’ दीपा ने स्पष्ट शब्दों में समर्पण से मना कर दिया। रमन ने दीपा को प्यार से बहला फुसलाकर मनाना चाहा पर व्यर्थ। दीपा करवट बदलकर सो गई।
यह कोई आज की बात नहीं थी। दीपा बड़ी मुश्किल से समर्पण को तैयार होती थी। प्रायः थकने, सिरदर्द, नींद या कोई और बहाना बनाकर वह रात को समर्पण से मना कर देती थी। कई दिनों बाद तैयार होती भी तो इस शर्त पर कि उसका जल्दी पीछा छोड़ा जाये। वह इस काम को ऐसे निपटाती थी मानो बेकार का काम हो। पति को अपनी तरफ से कोई सहयोग नहीं करती थी।
यह कोई एक दीपा की कहानी नहीं है। ज्यादातर भारतीय पत्नियों की यही कहानी है। वे सेक्स को दिनचर्या का एक हिस्सा समझती हैं। जिस तरह दूसरे काम रोज करती हैं, उसी तरह वे सेक्स को मानती हैं।
सेक्स दिनचर्या का हिस्सा जरूर है लेकिन दूसरे कामों की तरह निपटाने जैसा नहीं है। सेक्स दांपत्य का आधार है। सेक्स मात्रा मनोरंजन का साधन नहीं है, न ही सिर्फ शारीरिक भूख मिटाने का जरिया है। सेक्स जरूरत है। उसकी जरूरत हर पति और पत्नी की है।
सेक्स आनंद देता है। सेक्स शरीर की भूख मिटाता है। सेक्स पति-पत्नी एक-दूसरे के करीब लाता है। इसके जरिये दो शरीर मिलकर एक हो जाते हैं। उनमें किसी तरह का फासला नहीं रहता। फासला न रहने पर पति-पत्नी में प्रेम उपजता है। सेक्स संबंध जितने ज्यादा प्रगाढ़ होते हैं, पति पत्नी में प्रेम भी उतना ही ज्यादा होता है।
लेकिन अधिकांश औरतें सेक्स के महत्त्व को नहीं समझती। वे सेक्स को दूसरे कामों के समान मानती हैं तथा इसे पूरा करने की औपचारिकता मात्रा निभाती हैं। शादी के बाद कुछ साल तक तो वे इसमें पूर्ण रूचि लेती हैं लेकिन प्रायः मां बन जाने पर औरतें सेक्स के प्रति बेरूखी अख्तियार कर लेती हैं। वे या तो कोई न कोई बहाना बनाकर उससे बचने का प्रयास करती हैं और अगर कभी मना नहीं करती तो पति को सहयोग भी नहीं करतीं। इससे सेक्स सिर्फ एकतरफा बनकर रह जाता है। आदमी की वासना तो शांत हो जाती है लेकिन पत्नी के मन से भाग न लेने और सहयोग न करने के कारण पति को पूर्ण आनंद व संतोष प्राप्त नहीं होता।
पति को घर से बाहर रहकर धनोपार्जन के लिए तथा अन्य कार्य भी करने पड़ते हैं। पत्नी घर में काम करके थक जाती है। उसी तरह पति भी घर से बाहर रहकर कार्य करके मानसिक व शारीरिक दोनों तरह से थक जाता है। अपनी इसी थकान को वह रात को पत्नी से सम्भोग करके मिटाना चाहता है। सम्भोग सिर्फ शारीरिक थकान ही नहीं मिटाता अपितु जिंदगी में स्फूर्ति और ताजगी भी भर देता है। इससे दिनभर की थकान और मानसिक तनाव दूर हो जाता है।
अगर आप सेक्स में रूचि नहीं लेंगी, इससे बचने का प्रयास करेंगी, किसी तरह का सहयोग नहीं करेगी तो हो सकता है इससे आपके पति आपसे दूर होने लगें। घर में पत्नी से सेक्स सुख न मिलने पर वह पराई औरतों या बाजारू औरतों की तरफ भी झुक सकते हैं। इससे आपके दांपत्य में दरार पड़ सकती है। आपका वैवाहिक जीवन दुखी हो सकता है। सुख शांति भंग हो सकती है।
सेक्स संबंध प्रगाढ़ होने पर दांपत्य भी मजबूत होता है। पति पत्नी में खूब प्रेम रहता है। वे तनावमुक्त रहते हैं। किसी तरह का फ्रस्टेªशन पैदा नहीं होता। पति पत्नी में एक-दूसरे के प्रति प्रेम बना रहता है।
पत्नी को सेक्स का महत्त्व समझना चाहिए। उसे इसमें न अरूचि दिखानी चाहिए, न ही इससे बचने का प्रयास करना चाहिए।
पति को नाराज न करना पड़े, इसके लिए जरूरी है कि आप दिन में कम से कम घंटा या दो घंटा निकालकर जरुर आराम कर लें। ऐसा करने से रात को आप थका हुआ महसूस नहीं करेंगी, न ही जल्दी नींद आयेगी और पति के चाहने पर अपने आपको समर्पित भी कर सकेंगी।
ऐसा करने से आपका पति आपसे दूर नहीं जाएगा। वह सिर्फ आपका ही होकर रहेगा। (उर्वशी)

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