आयी पिया मिलन की रात

अपने प्रियतम से मिलने की चाह प्रत्येक युवती में जवानी की दहलीज पर कदम रखने के साथ ही शुरू हो जाती है। उसके मन में तरह-तरह के रंगीन सपने उमड़ते रहते हैं। ‘प्रियतम कैसा होगा’, ‘प्रथम बार मैं उनका सामना कैसे करूंगी’, ‘उनसे कैसे और क्या बातें करूंगी।’ ‘वह रात कितनी आनन्ददायक और खुशगवार होगी जब मैं अपने पिया से मिलूंगी।’ इसी तरह की मधुर कल्पनाओं में समायी हुई युवतियां दिन और रातें काटती हैं। लंबे इंतजार के बाद मिलने वाले इस मौके की नजाकत वास्तव में काबिले गौर है।
विवाह संस्कार की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद स्त्री-पुरूष इसी उत्सव रूपी विशेष रात्रि के माध्यम से अपने दांपत्य जीवन का श्रीगणेश करते हैं। अतः इस रात्रि का साक्षात्कार करने वाली युवतियों को इस अवसर को पूरी शालीनता, धैर्य, उत्साह और चतुराई से पूरा करना चाहिये। उन्हें यह हमेशा ध्यान रखना चाहिये कि यह रात उनके व्यक्तित्व की एक ऐसी अनोखी परीक्षा है जिसका अवसर जीवन में एक ही बार आता है।
जो युवती इस परीक्षा में पूर्ण सफलता प्राप्त कर लेती है, उसके विवाहित जीवन की प्रत्येक रात प्रथम मिलन की भांति स्वर्णिम हो जाती है। प्रथम मिलन का अनुभव पति-पत्नी दोनों के लिए जीवन भर की अमर स्मृति बन जाता है। इस अवसर पर आप परस्पर जैसा व्यवहार करते हैं और एक दूसरे को जिस प्रकार अपने व्यक्तित्व से प्रभावित कर पाते हैं, उसका प्रभाव दांपत्य जीवन पर अमिट रूप से छा जाता है। अंग्रेजी में एक कहावत है-प्रथम प्रभाव ही अंतिम प्रभाव है।
प्रायः इस अवसर पर युवतियां चुपचाप नजरें नीचे झुकाये गुडि़या सी बनी रहती हैं। पति द्वारा बार-बार पूछने पर भी कोई उत्तर नहीं देती। यह उचित नहीं है। यह सत्य है कि स्त्राी स्वभाव से शर्मीली और संकोची होती है। नये स्थान और नये लोगों के बीच आने पर संकोच और बढ़ जाता है लेकिन इसकी भी एक सीमा है। इसमें अति होना उचित नहीं, अतः आप अपने लज्जा धर्म एवं स्त्रिायोचित संकोच का पालन करते हुए भी माहौल को बोझिल होने से बचाने का प्रयास करें।
इस अवसर पर आपको सुसंस्कृत एवं शालीन आचरण द्वारा तथा मधुर वार्तालाप से एक दूसरे को प्रभावित करने का प्रयास करना चाहिए। इस समय को एक दूसरे से परिचय और आत्मीय संबंध स्थापित करने में लगाना चाहिये। एक-दूसरे की रूचियों तथा पारिवारिक जीवन के विषय में जानना समझना चाहिये। आपके द्वारा ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिये जो आपके जीवन साथी को विचलित, उद्वेलित या क्रोधित करे।
यह सत्य है कि प्रथम मिलन को सफल एवं सुखद बनाना आपसे ज्यादा आपके जीवन साथी (पति) की जिम्मेदारी है लेकिन न्यूनाधिक रूप में यह आपका भी दायित्व है। अतः आप इस मौके को यादगार और खुशगवार बनाने में अपनी ओर से कोई त्राुटि या गलती न करें। प्रथम मिलन के अवसर पर आपको झूठी शान, शर्म और रूढि़वादी मनोवृतियों को त्याग देना चाहिये। आपको अपने पति के प्रेम प्रस्तावों को संकोच या नकली प्रदर्शन करते हुए स्वीकार कर लेना चाहिये।
कभी-कभी ऐसा भी होता है कि प्रथम मिलन के अवसर पर जब पति-पत्नी पर प्रेम वर्षा करता है, उसे अपने प्रेम के वशीभूत करना चाहता है तो पत्नी ऐसा आचरण, व्यवहार या वार्तालाप अपना लेती है कि पति का सारा उत्साह ठंडा पड़ जाता है। यह बिल्कुल अनुचित है।
ऐसा करने से पति-पत्नी दोनों दांपत्य प्रेम के सच्चे सुख से वंचित हो जाते हैं, अतः आपके लिये जरूरी है कि प्रेम-प्रदर्शन द्वारा आप अपने जीवन साथी को पूर्ण सहयोग दें। इससे दोनों को सच्चा दांपत्य सुख प्रदान होगा। दोनों में आंतरिक आत्मीयता स्थापित होगी। प्रेम संबंधों में विस्तार होगा। इसी लक्ष्य को पाने के लिये तो आप विवाह बंधन में बंधी हैं।
सभी युवक-युवतियों में कुछ नाज-नखरे, मान मनौवल के भाव होते हैं लेकिन किसी बात में अति नहीं होनी चाहिये। यदि अति होती है तो इसका आपके जीवन साथी पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा और हो सकता है वे आपसे विमुख होकर किसी दूसरी स्त्री की ओर आकर्षित हो जाये।
यदि आपसे विवाह पूर्व कुछ गलतियां हुई हैं तो उसका भ्रम आप मन में न पालें। गुण दोष तो मनुष्य मात्रा में ही होता है। सहवास की स्थिति आने तक आप अपने प्रेम, अपनत्व एवं मधुर वचनों से पति को वशीभूत कर लें। इस अवसर का पूर्ण सदुपयोग करते हुए अपने प्रियतम के हृदय में बस जाने का प्रयास करें। यही इस अवसर की सार्थकता है। (उर्वशी)

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