ऐसे बिठायें ससुराल से ताल

कोई भी युवा लड़की जब ससुराल जाने के स्वप्न देखने शुरू करती है तो कुछ समय बाद उसे यह चिन्ता सताने लगती है कि वहां के लोगों के साथ अपनी ताल कैसे बिठा पायेगी? नए वातावरण में अपनी पहचान कैसे बना पायेगी? इस प्रकार के प्रश्न उसे बार-बार परेशान करते रहते हैं।
यदि आप अपने मन में यह तय कर लें कि अपना परिवार छोड़कर दूसरे परिवार को अपनाना है और इसी प्रकार हंसते, खाते-पीते रहना है तो यह समस्या आपको कभी बड़ी नहीं लगेगी और थोड़ी-सी समझदारी से आप उस परिवार की चहेती बन जायेंगी। कुछ बातों को ध्यान में रखते हुए सभी के दिलों पर राज करेंगी या उन सब के दिलों में अपने लिए जगह बना लेंगी।
** ननद और जेठानी से कभी ईष्र्या न करें।
** सास-ससुर को यथासंभव सम्मान दें।
** कभी परिवार वालों की बातों को छिपकर न सुनें।
** जेठानी की चुगली सास, ननद से न करें। न ही सास, ननद की कोई बात जेठानी से करें।
** अपने पीहर वालों की बढ़ाई न करती रहें। तुलना करने से ससुराल वाले अपने को नीचा महसूस करने लगेंगे।
** दहेज में आए सामान पर केवल आपका अधिकार नहीं है। संयुक्त परिवार में बहुत सी चीजों पर परिवार वालों का भी अधिकार होता है।
** ससुराल से आने वाले रिश्तेदारों का स्वागत मन से करें पर अपने मायके वालों को भी भूलें नहीं। उनको भी पूरा सम्मान दें।
** ससुराल के रीति-रिवाजों को समझकर, खुशीपूर्वक स्वीकार करें।
** पीहर में देने वाले उपहारों की चर्चा पति और सास से अवश्य करें। चुपचाप उपहार देने से संबंध बिगड़ते हैं।
** घरेलू समस्याओं पर परिवार वालों के साथ बैठ कर चर्चा करें और उनका हल ढूंढने में सहायक बनें।
** पति को अपनी व्यक्तिगत जायदाद न समझें। उन्हें भी परिवार की जिम्मेदारियां निभाने का हक और समय दें।
** परिवार समारोहों में खुशी से भाग लें और काम करने में यथासम्भव सहयोग दें।
** आर्थिक सहायता की आवश्यकता पडऩे पर यथासम्भव सहायता करें।
** बाहर जाने से पूर्व घर के बड़ों से सम्मानपूर्वक इज़ाजत लें।
** सास, ननद, देवरानी, जेठानी आदि से इतने अधिक अंतरंग संबंध भी न रखें जिन्हें जरा-सी ठेस लगने पर निराशा मिले।
** औरों से अधिक उम्मीदें न रखें। जितना सम्भव हो, उतना करें।
** बड़ों की छोटी मोटी टोकाटाकी पर बुरा न मानें। यदि टोकाटाकी अधिक हो तो पति की सहायता से कुछ विषयों पर स्पष्ट वार्तालाप करके अपनी बात समझाने का प्रयास करें।
** ससुराल से मिले उपहारों को सहर्ष स्वीकारें। चेहरे के हाव भाव से यह न जतलाएं कि उपहार आपके किसी काम का नहीं है या आपको पसंद नहीं है।
** फालतू की बहस के चक्कर में न पड़ें।
इन छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखते हुए सभी की चहेती बन सकती हैं  आप भी।————— (उर्वशी)




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