कहीं आप भटक तो नहीं रहीं?

किशोरावस्था या तरूणावस्था की उम्र ऐसी होती है जिसमें विपरीत सेक्स का आकर्षण अधिक होता है। चतुर पुरूष लड़के, लड़कियों की इस भावना का फायदा उठाते हैं। यह अवस्था होती ही ऐसी है जो कुछ भी देखती नहीं और परिणाम सोचती नहीं। किशोर उम्र का लड़का हो या युवा, अधेड़ उम्र का व्यक्ति या घर परिवार, दुकान, स्कूल या बाहर अक्सर मिलने, टकराने या उपलब्ध रहने वाला परिचित या अपरिचित व्यक्ति जिसने भी पहल की, कच्ची उम्र में वही पैर पसारना शुरू कर दिये और चल पड़ा एक कथित प्यार का सिलसिला।
आजकल के पुरूष या लड़के किसी लड़की के गुणों से नहीं बल्कि उसके रूप व यौवन से प्रभावित होकर लड़कियों से प्रेम व यौन संबंध बनाते हैं। फिर अपना स्वार्थ निकाल कर लड़की को दुष्चरित्र या ‘बासी चीजÓ बताने में भी नहीं चूकते। ऐसे तथाकथित प्रेमियों की भी कमी नहीं जो लड़की को अपने दोस्तों के सामने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष ढंग  से परोस देने से भी नहीं चूकते तथा लड़की को ब्लैकमेल कर फंसाए रखना चाहते हैं।
प्यार के नाम पर घर से भगा ले जाने, झूठे ब्याह रचाने, वेश्यावृत्ति कराने अथवा लड़कियों को बेच देने के किस्से अक्सर प्रकाश में आते रहते हैं तथा लड़कियां वेश्यावृत्ति या आत्महत्या करने के लिए विवश हो जाती हैं। लड़कियों को नौकरी या रोजगार दिलाने या कुछ मदद करने या प्रेम या ब्याह के नाम पर यौन शोषण की घटनाएं आम बात हैं।
दुर्भाग्य से कुछ स्वार्थी महिलायें भी लड़कियों का शोषण कराने में अथवा शोषण से उत्पन्न समस्याओं को बड़ी कुशलता से शांत करने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कई महिलायें लड़कियों से घुल-मिल कर उनकी भावनाओं पर सहानुभूति का मरहम लगा कर उनसे उनके दिल की बात पूछ लेती हैं तथा जिन्दगी में उन्हें रूला (बदनाम) कर छोड़ती हैं जिसका परिणाम लड़कियों को ही भुगतना पड़ता है। भटकी हुई या बदनाम लड़की को हर कोई दूसरी नजर से देखता है।
लड़कियों के लिए
** पुरूषों के सामने अपनी गौरव गरिमा बनाये रखें। अपने आत्मसम्मान को कभी न गिरने दें। अपने आप को कभी भी दुर्बल या असहाय न समझें। दूरदर्शिता से कार्य लें।
** रूषों को ‘चुग्गाÓ डालने वाली या भावनाएं बनाने वाली बातों से बचें। अपनी परेशानियों या अभावों का रोना न रोती फिरें।
** किसी से एकांत में विपरीत सेक्स की बातें करना या अधिक समय तक रहना ठीक नहीं भले ही वह आपके पिताजी की उम्र के हों।
** पुरूषों से केवल सहज मेलजोल ही रखें। अश्लील किस्से, कहानियां या प्रेम व यौन संबंधों की कहानियां विपरीत सेक्स वालों से न सुनें।
** बेढंगी चाल, अनावश्यक मेकअप, अशिष्ट अभद्र व्यवहार, उत्तेजक पहनावा, गलत किस्म के लोगों को आकर्षित करता है, इससे बचें।
** दनाम, दुष्चरित्र महिलाओं व लड़कियों से मित्रता रखना ठीक नहीं। इनके व्यक्तित्व की पहचान आप उनकी बातचीत व कार्यकलापों से कर सकती हैं।
** आपको हजारों प्रेमी मिल जायेंगे। अपने आप को सस्ता न बनने दें। तथाकथित प्रेमियों से बचें। झूठे प्रेम के पचड़े में पड़कर स्वयं को पथभ्रष्ट होने से बचायें।
** यस्त रहें, अपने खाली समय का उपयोग सुरूचिपूर्ण साहित्य पढऩे या रचनात्मक कार्य में लगायें। 
अभिभावकों के लिए
** अभिभावकों को चाहिए कि वे लड़कियों को समझें और इस ढंग से निर्देशित करें कि उनके व्यक्तित्व का स्वस्थ और संतुलित विकास हो।
** अनावश्यक रोक-टोक या डांट-डपट उचित नहीं। लड़की से एक मित्र की तरह प्रेम व सहानुभूति का व्यवहार करें तथा एक आदर्श अभिभावक बन कर दिखायें।
** लड़कियों की किशोरावस्था व तरूणावस्था की समस्याएं जैसे मासिक धर्म, हस्तमैथुन, विपरीत सेक्स का आकर्षण, नासमझी का प्यार, श्वेत प्रदर, खुजली आदि पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण देकर उनका मार्गदर्शन करें।
** लड़की को समझा दें कि बढ़ती उम्र के साथ उसमें मातृत्व क्षमता भी आ गयी है। लड़की में वैवाहिक मूल्यों के प्रति आस्था उत्पन्न करें और उसे हर हाल में पुरूष संसर्ग से बचने की सलाह दें।
** यदि लड़की भटक जाये, तो धैर्य से काम लें। मार-पीट या डांट डपट समस्या का हल नहीं। उसे अच्छे बुरे का ज्ञान करायें। उसके मन की टोह लें और एक मित्र की तरह उसका मार्गदर्शन करें। (उर्वशी)




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