छेड़खानी की बीमारी, कैसे मुकाबला करे नारी

छात्रा हो या गृहिणी या कामकाजी महिला, घर से बाहर निकलते ही तरह-तरह की छेड़खानियों का सामना करना उनकी नियति बन गयी है। सार्वजनिक स्थलों, मार्केट, पार्क या मुहल्ले में अक्सर तमाम सड़क छाप रोमियो से पाला पड़ता है। यहां तक कि अपने घरों में भी आज की नारी छेड़खानी की महामारी से नहीं बच पाती। लड़कियां जब बचपन की दहलीज पार करती हैं, तभी से उनको छेड़छाड़ की वास्तविकता का सामना करना पड़ता है।
छेड़खानी का सामना लड़कियों को अपने घर में भी करना पड़ता है। रिश्तेदारों में ही कुछ ऐसे अभद्र पुरूष होते हैं जो घर आने पर बच्चियों को उठाकर गोद में बिठा लेते हैं और उनके यौवनांगों को सहलाते रहते हैं। भींच कर सीने से चिपका लेना आदि कई क्रियाओं द्वारा नाबालिग बच्चियों से छेड़खानी चलती रहती है।
छेड़खानी करने वालों की भी कई किस्में होती हैं। कुछ शेरो-शायरी की कलात्मक, शालीन भाषा में खूबसूरती के कसीदे पढ़ने वाले होते हैं। इनको चुपचाप अनदेखा करने से ही मुश्किल हल हो जाती है। इसके बाद नंबर उनका आता है जो छेड़छाड़ के नाम पर महज पीछा करते हैं। ऐसे लोग कायर, मूर्ख और भावुक होते हैं। इन्हें एक बार जोरदार डांट मिल जाये तो फिर दुबारा पीछा करने की हिम्मत नहीं करते।
सबसे अधिक निकृष्ट वे होते हैं जो सार्वजनिक स्थलों, स्कूल-कॉलेज के सामने, मार्केट में, किसी पान की दुकान पर खड़े होकर आती-जाती लड़कियों पर फिकरे कसते हैं और उनके स्तनों की तरफ कामुक नजरों से देखते हैं।
यूं तो छेड़छाड़ के नित नये तरीके बराबर निकलते रहते हैं पर छेड़छाड़ के पुरातन तरीके भी ज्यों के त्यों चले आ रहे हैं। रास्ते चलते लड़कियों पर फिकरा कसना, रिक्शे या स्कूटी से आती-जाती लड़कियों का दूर-दूर तक पीछा करना, गांवों, छोटे शहरों में एकान्त पाकर दुपट्टा या साड़ी का पल्लू खींच लेना, चॉक के टुकड़े, खाये हुए फल के बीज या छिलके, यहां तक कि सिगरेट के टुकड़े लड़कियों पर फेंक देना आम बात होती है।
किसी मेले, दुर्गा पूजा, दशहरा आदि के अवसर पर तो छेड़खानी उद्दंडता की सीमा को पार कर जाती है। आगे-पीछे चलना, धक्का मार देना, चाट-पकौडि़यों की दुकान पर साथ-साथ पहुंचकर खाना और फिकरे कसना खुशनुमा वातावरण को भी दूभर बना डालता है।
पता नहीं छेड़खानी की प्रथा का चलन कब से प्रारंभ हुआ परन्तु इसकी महामारी संक्रामक बीमारी की तरह दिन-प्रतिदिन फैलती ही जा रही है और लड़कियों, महिलाओं का घर से निकलना तक दूभर करती जा रही है। प्रगति की दुनियां में इससे डरकर घर में बैठे रहना भी संभव नहीं है अतः इस परिस्थिति से जूझने के काबिल स्वयं को बनाना होगा। थोड़ी-सी समझदारी और कॉमनसेंस से छेड़खानी की महामारी पर काबू पाया जा सकता है।
आपकी शारीरिक भाषा उस गुप्त हमलावर को यह बताती है कि वह आपसे नाजायज फायदा उठा सकता है या नहीं या आपके शरीर से कुछ छीन सकता है या नहीं। शारीरिक भाषा यानी बॉडी लैंग्वेज, ज्यादातर नारियों को छेड़खानी की परेशानी में फंसा देती है। छेड़खानी की महामारी से प्रतिकार करने के लिए इन उपायों को अपनाइए।
-घर से बाहर निकलते समय सलीकेदार वस्त्रों को पहनिए। अर्द्धनग्न वस्त्रों को पहनना छेड़खानी को आमंत्राण देना होगा।
-ध्यानाकर्षण करने वाले भड़कीले कपड़े, कीमती गहने आदि पहन कर मत निकलिए। स्तनों के उभार को छिपाए रखने के लिए दुपट्टा या साड़ी का पल्ला ठीक से रखिए।
– रास्ते में चलते समय सिर झुका कर सिर्फ नीचे देखते हुए चलें। अपनी आंखें व कानों को खुला रखें तथा आसपास के वातावरण के प्रति सजग रहें।
-उन रास्तों से आना-जाना न करें या कम कर दें जहां का रास्ता सुनसान हो। अंधेरे में तो ऐसे रास्तों से बिलकुल न जायें भले ही वह रास्ता शार्टकट या छोटा ही क्यों न हो।
-दुर्भाग्यवश कोई विपरीत परिस्थितियां आ ही जाती हैं तो बजाय ‘बचाओ बचाओ’ चिल्लाने के खूब जोरों से चीखें या चिल्लायें। इससे लोगों का ध्यान तुरंत आकृष्ट होता है। बचाओ-बचाओ की आवाज सुनकर भी कोई मदद करने इस लिए नहीं आता है कि कौन मुसीबत में पड़े।
अधिकतर वैसी ही महिलाओं को हमलावर तंग करते हैं जो शारीरिक भाषा से स्वयं को कमजोर दिखाती हैं। उत्तेजक परिधान आपके आत्मविश्वास को कम करने वाले होते हैं।
– सहपाठियों या सहकर्मियों या बॉस की मानसिकता को अच्छी तरह समझ लीजिए और बेवजह ज्यादा घुलें-मिलें नहीं। ऐसी इमेज न बनायें, जिससे वे आपको स्वतंत्रा और उन्मुक्त विचारों वाली समझें।
– भविष्य में अन्य लाभ या प्रोन्नति पाने के लिए सस्ता रास्ता न अपनायें व इन कुटिल षडयंत्राकारियों से एकदम अलग रहें।
– पति के मित्रा या संबंधी के आने पर उसके समक्ष अनावश्यक मत रहिए। घर पर अकेली रहने पर बरामदे में बैठकर ही बातें करिए एवं अपने परिधान पर ध्यान अवश्य रखिए। किसी के द्वारा दी गई खाद्य सामग्री या प्रसाद को तुरंत मत खाइए वह नशीला-मादक पदार्थ भी हो सकता है।
-अत्यंत आवश्यकता न हो तो किसी किस्म की लिफ्ट या किसी की सहायता ग्रहण मत करिए। ऐसे में लोग अनुचित फायदा उठाने से नहीं चूकते।
शालीनता की परिधि में रहकर छेड़खानी की महामारी से स्वयं को बचाया जा सकता है। स्वतंत्रा व उन्मुक्त विचारों को अपनाकर, भड़कीली पोशाकों को पहनकर, अर्द्धनग्न शरीर का प्रदर्शन करके न सिर्फ परेशानियों में ही फंसेंगी बल्कि अपनी अस्मत को भी दांव पर लगा बैठेंगी। मनोबल, साहस व आत्मविश्वास से छेड़खानी की महामारी को आप नियंत्राण में रख सकती हैं। (उर्वशी)

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