दिन शनिवार इतना अशुभ तो नहीं

सप्ताह के पूरे सात दिनों में एक दिन ऐसा आता है जिस दिन किसी अशांत, अनिष्ट के भय से अच्छे अच्छों को सांप सूंघ जाता है। यह दिन दंड के देवता शनिदेव के नाम से शनिवार के रूप में जाना जाता है।
शनिदेव के उग्र स्वभाव को लेकर कई तरह के रोचक किस्से कहानियां भारतीय जन मानस में प्रचलित हैं। इन सभी किस्सों कहानियों का मूल स्वर एक ही है कि शनि की नजर जिस पर भी पड़ती है, उसका सत्यानाश हो जाता है, धन दौलत से लेकर सेहत और पारिवारिक सुख शांति पल भर में मिट्टी में मिल जाते हैं लेकिन क्या वाकई ऐसा है?
यदि यह मान लिया जाए शनिवार को केवल अशुभ ही होता है तो जिनका जन्म शनिवार को हुआ है वे आजीवन कष्ट में बिताते मगर कई सफल लोगों के बारे में पता लगाया गया तो पता चला कि वे शनिवार को ही जन्मे हैं जबकि कई असफल लोग जो अन्य दिनों में पैदा हुए, उन्हें इस बात का मलाल होगा कि वे शनिवार को क्यों पैदा नहीं हुए।
दिन शनिवार को लेकर हम भारतीय इतना अधिक भयभीत रहते हैं कि इस दिन आटोमोबाइल जगत में लगभग सन्नाटा पसरा रहता है जबकि विदेशों में शनिवार को आटोमोबाइल का कारोबार धड़ल्ले से चलता रहता है। लोग कहते हैं कि शनिवार को लोहा लंगड़ का कारोबार नहीं करना चाहिए। यदि यह सच होता तो इस दिन वाहनों की टक्कर एक आम बात होती। एक-दो नहीं, लाखों करोड़ांे वाहन, हवाई जहाज आपस में टकरा जाते लेकिन क्या कभी ऐसा हुआ है कि शनिवार के दिन ही वाहन दुर्घटनाएं हुई हों, किसी और दिन नहीं।
इसका मतलब यह हुआ कि शनिवार के साथ लोहा लंगड़ के व्यवसाय या उसके शुभ अशुभ होने का कोई संबंध ही नहीं है। इसी तरह पारिवारिक सुख शांति, सेहत और आर्थिक तंगी से भी शनिवार का कोई संबंध नहीं है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि शनिदेव दंड के देवता है। उनकी भूमिका सभी के लिए न्यायाधीश के समान है। वे न्यायप्रिय देवता हैं, फिर एक न्यायाधीश बुरा कैसे हो सकता है। इंसान यदि गलती करेगा तो उस गलती का फल उसी को भोगना पड़ेगा।
पारिवारिक सुख शांति भी परिवार के लोगों के आपसी व्यवहार पर ही निर्भर करती है। यदि परिवार के लोग शिक्षित होने के साथ समझदार भी हों, उनमें आपसी भाईचारा और प्रेम हो तो उस परिवार जैसा सुखी परिवार तो दूसरा कोई हो ही नहीं सकता। बीमारियों को शनि की कुदृष्टि से जोड़ा गया है जो कि गलत है। यदि हम स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें, घर में पर्याप्त साफ सफाई का ध्यान रखंे और खान-पान भी संभल कर करें तो मजाल है कि बीमारियां हमारे आस-पास भी फटकने की जुर्रत करें।
आप देखेंगे और पाएंगे कि विदेशी हम भारतीयों से ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे शिक्षित होने के कारण हम भारतीयों की तरह-यहां वहां गदंगी नहीं फैलाते। साफ-सफाई का ध्यान रखना विदेशियों का एक खास गुण है। हम भारतीयों को उनसे सबक लेना चाहिए। अब आइए इस पर भी चर्चा कर लंे कि आर्थिक तंगी का शनि देव से क्या संबंध है। इसका उत्तर भी यही है कि कोई संबंध नहीं है। यदि हम दर्जन भर बच्चे पैदा नहीं करें, आय के अनुसार खर्च को सीमित रखें तो आर्थिक तंगी से काफी हद तक बचा जा सकता है। नशाखोरी का त्याग, कर्ज लेने की प्रवृत्ति का परित्याग कर भी आर्थिक तंगी से बचा जा सकता है।
हमारे सौर मंडल में चार-ग्रह शनि, यूरेनस और नेपच्यून तथा बृहस्पति वलय (रिंग) से घिरे हुए हैं। शनि के वलय के बारे में खगोलशास्त्राी गैलीलियो ने 1610 में सर्वप्रथम दुनियां को बताया। सन् 1663 और 1685 में फ्रेंच और डच खगोलशास्त्रिायों ने इसके दूसरे और तीसरे वलय की खोज की। चौथे वलय की खोज 1959 में की गई। पायनियर-प्प् ने शनि के तीन और वलय का पता लगाया। इस तरह अभी तक शनि के कुल सात वलयों (छल्लों) का पता लगाया जा चुका है लेकिन ये सभी वैज्ञानिकों के लिए पहेली ही बने हुए हैं।
दिलचस्प बात तो यह है कि शनि के खोजे गए सात वलयों (छल्लों) की संरचनाओं के राज जानने के बाद ही उसके छरताल और आंतरिक गतिविधियों जैसे आंधी-तूफान आने जाने और वहां होने वाली अन्य प्राकृतिक घटनाओं के बारे में पता लगाया जा सकेगा जिसके लिए अब शायद बहुत लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अभी तक जो जानकारियां मिली हैं उसके अनुसार बताया जाता है कि शनि ग्रह के अंदर प्रति सेकेंड एक हजार बार बिजली चमकती है। तूफान आने की स्थिति में इस ग्रह का स्वरूप इतना उग्र हो जाता है कि दस हजार कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने लगती हैं। शायद यही वजह है कि इस ग्रह के संदर्भ में कई तरह की खौफनाक अवधारणाएं भारतीय जनमानस में प्रचलित हैं।
——– (उर्वशी)
——- रमेन दास गुप्ता ‘शुभ्रो’

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