दिल चुरा ले गई तेरी बिंदिया

माथे पर चमकती बिंदिया सुहाग का प्रतीक मानी जाती है और नारी का श्रृंगार तभी संपूर्ण है जब माथे पर बिंदिया दमक रही हो। बिंदिया चिपकने वाली व लिक्विड दोनों रूपों में लगाई जाती है। गर्मियों में पसीने के कारण बिंदिया लगाना मुश्किल होता है पर सर्दियों में तो बिंदिया अपने दोनों रूपों में छटा बिखेरती है।
त्यौहारों और विशेष अवसरों पर तो बिंदी नारी सौंदर्य को दुगुना कर देती है। बिंदियों के भी विभिन्न डिजाइन प्रचलन में हैं और जिस प्रकार कपड़ों के डिजाईन बदलते हैं बिंदियाँ भी नए-नए रूपों में प्रचलन में हैं। अपने माथे के अनुरूप आप छोटी या बड़ी बिंदी का प्रयोग कर सकती हैं।
अगर आपका माथा छोटा है तो बहुत बड़ी बिंदी का प्रयोग न करें। अगर माथा बड़ा है तो आप छोटी, बड़ी कोई भी बिंदी प्रयोग में ला सकती हैं। अगर आपके चेहरे का आकार लंबा है अर्थात् ओवल आकार का है तो लंबी बिंदी न लगाकर मोटी व गोल आकार की बिंदी लगाएं और अगर चेहरा छोटा है तो बहुत बड़े आकार की बिंदी न लगाकर छोटी बिंदी लगाएं।
लिक्विड बिंदी को आप अपने डिजाइनानुसार लगा सकती हैं। इसके लिए आप पतला ब्रश लें। लिक्विड बिंदी के मनभावन डिजाइन बनाने के लिए आपको ब्रश पकडऩे का अभ्यास करना चाहिए और उससे डिजाइन बनाने का भी। लिक्विड बिंदी गर्मी के मौसम में तो पसीने के कारण बह जाती है पर सर्दियों में बिंदी अधिक देर तक टिकी रहती है। बिंदी का प्रयोग करते समय कुछ सावधानियां अवश्य बरतें:-
ह्य अगर आपकी त्वचा जल्द ही एलर्जी का शिकार हो जाती है तो बिंदी को 5-1० मिनट लगाएं और फिर उतारें। अगर त्वचा पर खुजली या दाने हो रहे हैं तो चिपकाने वाली बिंदी की बजाय लिक्विड बिंदी लगाएं। कई बार खराब क्वालिटी की बिंदी भी त्वचा पर एलर्जी का कारण बनती है इसलिए सदैव अच्छी क्वालिटी की बिंदी खरीदें जिस पर लगा चिपकाने वाला पदार्थ त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाए।
ह्य रात को सोने से पूर्व बिंदी सदैव उतारकर सोएं। अन्य सौंदर्य प्रसाधनों की तरह क्लींजिंग मिल्क की सहायता से लिक्विड बिंदी साफ करें।
ह्य त्यौहारों व विशेष अवसरों पर ही डिजाइनर बिंदी या नगों वाले चमकीली बिंदियों का प्रयोग करें। नियमित साधारण बिंदी का ही प्रयोग करें। एक तरह से कहा जाए तो अवसर अनुरूप ही बिंदी का चयन करना चाहिए। —————- (उर्वशी)




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