न बनें अनचाहे मेहमान

वैसे भारतीय समाज में मेहमान को भगवान का दर्जा दिया जाता है परंतु जब वहां मेहमान वक्त-बेवक्त आ धमके तो मेजबान को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कई बार लोग सरप्राइज देने के चक्कर में अचानक किसी के घर मेहमान बनकर पहुंचते हैं तो मेजबान के साथ-साथ खुद भी परेशान होते हैं।
इस संबंध में शान मेहता कहते हैं, ‘वैसे यह आवश्यक नहीं कि सरप्राइज विजिट सदैव दुखद ही हो। कई बार इससे मेजबान व मेहमान दोनों को ही खुशी मिलती है परंतु मेरे ख्याल से सरप्राइज विजिट को रोमांचकारी बनाना आपके अपने हाथ में है। यदि आप मेजबान को सरप्राइज देना ही चाहते हैं तो उसके शहर पहुंचकर स्टेशन या बस स्टैण्ड से फोन पर पूर्व सूचना दे सकते हैं।’
मेजबान के साथ-साथ सरप्राइज विजिट आपके लिए भी दुखद हो सकती है जैसा कि आरती के साथ हुआ।
आरती की बहन मुंबई में रहती थी। उसने काफी बार आरती व उसके पति नितिन को अपने घर आने का बुलावा दिया था परंतु नितिन के कार्यबोझ के कारण वे वहां नहीं जा पाते थे।

एक दिन नितिन ऑफिस से घर आया तो उसने आरती से कहा, ‘आरती पैकिंग वगैरह कर लेना, हम परसों मुंबई जा रहे हैं।’
‘क्या?‘ आरती खुशी से फूली न समाई-।
‘हां आरती। ऑफिस में काम थोड़ा कम है इसलिए मैंने सोचा क्यों न मुंबई घूम आएं।‘
‘सच! दीदी कितनी खुश होगी हमें देखकर।‘ आरती ने प्रसन्नता से कहा।
वे भी दीदी को सरप्राइज देना चाहते थे इसलिए ही उन्होंने उन्हें अपने आने की पूर्व सूचना नहीं दी।
वैसे तो उनकी टेªन पहुंचने का वक्त शाम सात बजे था परंतु टेªन लेट होने के कारण उन्हें पहुंचते-पहुंचते बारह बज गए।
जब वे दीदी के घर पर पहुंचे तो वहां ताला लटका देखकर उनके प्राण सूख गए। एक तो अनजान शहर, दूसरा इतनी रात, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे क्या करें।
अभी वे यह सब सोच ही रहे थे कि तभी वहां एक टैक्सी आकर रूकी। उसमें से आरती की बहन व उसके पति नीचे उतरे। वे दोनों ही आरती को वहां देखकर भौंचक्के रह गए।
‘अरे, तुम कब आए?‘ दीदी के चेहरे पर अभी भी हैरानी के भाव थे।
‘बस दीदी अभी कुछ देर पहले।‘ आरती रूआंसी होकर बोली।
‘एक फोन तो कर दिया होता’, दीदी बोलीं। ‘दीदी। हमने सोचा क्यों न आपको सरप्राइज दें, बस इसलिए।‘
‘तुमने यह सोचा है कि अगर हम नहीं आते तो तुम्हारा यह सरप्राइज तुम्हें कितनी तकलीफ देता।‘ दीदी ताला खोलते हुए बोलीं।
आरती व नितिन काफी शर्मिंदा हुए। उसके बाद वे कहीं भी जाते हैं तो अपने आने की पूर्व सूचना अवश्य देते हैं।
सरप्राइज विजिट किसी जोखिम से कम नहीं है। इससे मेजबान को असुविधा होने के साथ-साथ मेहमान की उमंगों व उत्साह में भी कमी आती है, जिससे मेजबान व मेहमान दोनों ही तनाव का शिकार हो जाते हैं, इसलिए कहीं भी जाने से पूर्व आपको ज्ञात होना चाहिए कि जहां आप मेहमान बनकर जा रहे हैं, वे लोग घर पर हैं भी या नहीं।
इसका सबसे बढि़या तरीका यह है कि पहले आप उन्हें फोन करके उनका कुशलक्षेम पूछ लें। इससे आपको यह पता चल जाएगा कि जिससे आप मिलना चाहते हैं, वे कुशलपूर्वक घर पर ही हैं यानी आपके अचानक वहां जाने पर उन्हें कोई खास परेशानी तो नहीं उठानी पड़ेगी। वैसे बेहतर रहेगा कि आप उन्हें हल्का संकेत दे दें।
——– (उर्वशी)
——- भाषणा बांसल

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