पत्नी ही इंकार क्यों करती है ?

ओह आज नहीं, आज मेरा मूड नहीं है। कितनी गर्मी है आज। क्या हालत बना रखी है आपकी दाढ़ी के खूंट बढ़ गये हैं। नहीं-नहीं, आज बिलकुल नहीं। अभी मुझे यह उपन्यास पूरा करना है। न जाने कितने बंद दरवाजों के भीतर कितने पति अपनी पत्नियों की न से आहत होकर अपने पौरूष से विश्वास खो बैठते होंगे।
सहवास निमंत्रण पर उत्तर में न सुनना पक्के आत्मविश्वासी को भी कमजोर बना सकता है और जीवन एवं परिवार से बैरागी। एक अति संवेदनशील पुरूष न के लगातार प्रहार से घर परिवार भी छोड़ सकता है। पुरूष के लिए सेक्स एक जरूरत है। उसका अस्तित्व सहवास की कामना एवं कामनापूर्ति से गहरे जुड़कर ही सार्थक कहलाता है।
आज स्त्री पुरूष के संबंधों को लेकर सभी चिंतित हैं। पत्र पत्रिकाओं में यौन प्रश्नों पर इतनी खुली चर्चा का अर्थ है इस प्रश्न का पारिवारिक और सामाजिक सुख-समृद्धि से गहरा जुड़ाव है। यह भी सच है कि पत्नी के न कहे जाने की इनमें चर्चा अधिक होती है।
जरा सोचिये कि आखिर ऐसा क्यों होता है। दरअसल, समागम के लिए पति हमेशा उत्सुक रहता है जबकि पत्नी न करने को मजबूर रहती है। इसका कारण यह है कि एक सामान्य मनोस्थिति वाली पत्नी प्राय: सहवास के लिए न करने को बाध्य होती है।
सेक्स और माहौल का अटूट संबंध है। सेक्स के लिए सफाई, शांति व आराम, चाहिये। ज्यादा संबंधियों से भरे घर में बच्चों की चिल-पों के बीच गंदे व अस्त व्यस्त कमरे में जहां न हवा हो न सुखद वातावरण, दीवारें इतनी पतली हो कि कमरे से हर आवाज बाहर पहुंच जायें, हर पल एकांत के छिन जाने का डर, हर समय बहू, भाभी, चाची जैसी गुहार सुनाई देने की संभावना हो तो वहां पत्नी यदि न कहे तो इसमें पति को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि सहवास एक अंतरंग प्रक्रिया है।
इसे गोपनीय रखें तो गलत न होगा और इसकी यह गोपनीयता बनाये रखने की सुविधा न हो तो पत्नी का न कहना अनुचित न होगा। ऐसे में पति को ही कुछ ऐसा करना चाहिए कि उचित वातावरण मिल सके और बार-बार पत्नी की न झेलनी न पड़े।
बच्चे बड़े हो जायें तो कभी पत्नी उनके अचानक आ जाने या जाग जाने की आशंका से भी पति के निमंत्रण को अस्वीकार कर सकती है। यदि संतान छोटी हो और उसका दूध का समय हो रहा हो या वह सो नहीं रहा हो तो पति का अधैर्य उसके मूड को बिगाड़ सकता है। कुछेक पति तो ऐसे समय में इतने स्वार्थी हो जाते हैं कि तुनक कर कह बैठते हैं।
कमबख्त को इसी समय जागना होता है। तुम इसका दूध का समय आगे पीछे कर लो। यह तो बड़ी मुसीबत है। फेंक दो इसको खिड़की के बाहर। एक ममतामयी मां के लिए ये वाक्य बड़े कष्टदायक भी हो सकते हैं। उस समय वह पत्नी के रूप में खरी कभी नहीं उतर सकती । हां, मां कभी कभी रणचंडी अवश्य बन सकती है। यदि ऐसे समय में दोनों ही विवेक और धैर्य से काम लें तो कोई उलझन पैदा नहीं होगी। पति कुछ देर किताब पढ़े, संगीत सुने या टहले। इस बीच बच्चा भी अपनी जरूरत पूरी होने पर सो ही जाएगा।
समय और मूड का न और हां से गहरा संबंध है। सवेरे जल्दी उठकर बच्चे को तैयार करने व नाश्ता बनाने वाली पत्नी इस अभियान से लौटकर वापस आये और इन दो घंटों में अतिरिक्त नींद ले चुका पति उसका पूरा सहयोग चाहे तो क्या वह दे पायेगी।
इसी तरह दफ्तर के लिए पति की पूरी तैयारी करके स्वयं के दफ्तर जाने से पहले पति के आतुर आमंत्रण को क्या खुशी से स्वीकार कर पाने की शक्ति होगी उसमें?
इस विषय में पुरूषों का मूड अटपटा सा होता है। कुछ पुरूष जब चाहें, ऐसा निमंत्रण दे बैठते हैं और पत्नी को मजबूर होकर न कहना पड़ता है। इस न को सुनकर पत्नी तथा अपने जीवन कोसना व कोसते हुए बाहर चले जाना घर में अशांति व तनाव का वातावरण पैदा कर देता है।
शारीरिक अस्वस्थता या लापरवाही के कारण भी एक पत्नी की न पुरूष को सहन नहीं होती। तुम साल भर बीमार ही रहती हो। कभी सिर दर्द, कभी पेट दर्द, हर समय कहीं न कहीं दर्द होता रहता है। इससे अच्छा था कि कुंआरे ही रहते। शारीरिक अस्वस्थता के समय जबरन सहवास करना ज्यादती होगी। ऐसे में पति से धैर्य की अपेक्षा की जाती है और पत्नी से शांत रहने की क्योंकि उसके विलाप या आत्मग्लानि से कुछ बनने वाला नहीं। ऐसी हरकत से पति यही समझेगा कि वह नाटक कर रही है।
कभी-कभी ऐसा भी होता है।
 कभी-कभी कोई कारण न होने पर पति को पत्नी के व्यवहार से लगता है कि वह सहवास से मुकर रही है। यह तब होता है जब सहवास के लिए प्रेरित होने में पत्नी को कुछ देर लगती है। इस देरी के लिए या तो सही मामलों में रोमांटिक माहौल या पति की भावनाओं का अभाव हो सकता है या फिर स्वयं की उसकी शारीरिक संरचना। ऐसे में पत्नी दोषी नहीं होती। यदि वह उत्तेजित देर से होती है तो इसे उसकी न समझने की गलतफहमी नहीं करनी चाहिए। 
कभी-कभी हमेशा भरपूर सहयोग देने वाली पत्नी भी न कह बैठे तो पति को समझना चाहिए कि कोई कारण अवश्य है, यह मात्र बहाना नहीं और इस समय प्यार और समझ के माध्यम से कारण पता लगा कर पुन: पत्नी से सहयोग प्राप्त कर सकता है।
ऐसे में न करने के कारण मामूली हो सकते हैं गर्मी या ठण्ड अधिक होना, बहुत देर हो जाना, पति की सांस से सिगरेट या शराब की गंध आना, पैर या कमर में दर्द होना, गर्भ निरोधक गोलियां समाप्त हो जाना, पत्नी का बेहद थक जाना इन सब छोटी-छोटी बातों से या तो वह जताना चाहती है कि वह पिछले अन्याय का बदला ले रही है या फिर वह पति के प्यार को तोलना चाहती है, पति से मनुहार चाहती है।
कभी-कभी पत्नी स्वयं इतनी भ्रमित होती है कि उसे समझ में नहीं आता कि वह ऐसा क्यों करती है। मनोचिकित्सक कहते हैं कि बचपन से सहवास के प्रति मन में पड़ी हुई भ्रांतियां हो सकती हैं जैसे उसकी शिक्षा दीक्षा इस प्रकार हुई हो कि वह सेक्स को एक बेशर्म हरकत समझती है।
अपनी शारीरिक रचना या उनकी कर्मियों को लेकर संकुचित हो उठती हो और यह भी हो सकता है कि वह किशोरावस्था में किसी काल्पनिक पुरूष का चित्र हद्य में संजोये हुए हो और वास्तविक पति से उसका मिलान करके उसे उस रूप में न पाकर निराश होती हो।
अक्सर कच्ची उम्र की किशोरियां रोमांटिक उपन्यास पढ़कर किसी हीरो से मन-ही मर प्यार करने लगती हैं और विवाह के बाद पति से असंतुष्ट रहती हैं। कभी-कभी पति की बेवफाई के बारे में शक होने पर या स्वयं कहीं अन्यत्र दिल लग बैठने पर भी पत्नी सेक्स से दूर भागती है। पति की बेवफाई से उपजी असुरक्षा की भावना या स्वयं अपना पश्चाताप हो सकता है। उस न को अपमान न समझकर उसे लाचारी समझकर उससे भरपूर हमदर्दी जतायें।
स्वयं एक मनोविश्लेषक बनकर पत्नी को सही ढंग से समझ कर उसे समझना होगा। यदि स्थिति गंभीर हो तो बड़े शहरों में आजकल वैवाहिक सलाहकारों के पास जाने की भी सुविधा है। उनसे राय लेकर पति पत्नी एक बार फिर तरोताजा हो सकते हैं लेकिन सबसे बड़ा अस्त्र है समायोजन जिसकी न नींव है प्यार और सिर्फ प्यार। —————– (उर्वशी)




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *