परिचित व्यक्ति के सम्मुख खुली किताब न बनें

समाज में जटिलताएं इतनी अधिक बढ़ गई है कि व्यक्ति का दिमाग जीवन के कटु सत्यों व पवित्र भावनाओं से हटकर गंदी व चरित्र पतन की ओर उन्मुख करने वाली घटनाओं की ओर अग्रसर हो चला है।
वर्तमान में शिक्षा का महत्त्व बढ़ा है। लड़का हो या लड़की, महत्त्वाकांक्षा के घोड़े पर सवार अपनी-अपनी मंजिल को खोजने में रत हैं और मंजिल तलाशते-तलाशते ही कई बार विपरीत सेक्स के व्यक्ति आपस में घनिष्ठता बढ़ा बैठते हैं और इसी घनिष्ठता के चलते अपनी कुछ कमियों व विशेषताओं को एक-दूसरे के समक्ष इस तरह से वर्णन करते हैं कि दूसरा प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता और कुछ ऐसे ही दौर में दोनों पक्षों से ऐसी गलतियां हो जाती हैं जो दोनों को ही महत्त्वाकांक्षा के घोड़े से उतार कर समस्या निदान रूपी घोड़े पर चढ़ा देती हैं।
वर्तमान के जटिल परिवेश में युवा होती लड़की को चाहिए कि वह किसी परिचित पुरूष के सन्मुख अपनी प्रत्येक बात को बढ़ा-चढ़ा कर नहीं करे। छिछोरी हरकतें करने वाले पुरूष समुदाय से बचने के लिए यही बेहतर तरीका है कि आप किसी परिचित व्यक्ति के सम्मुख खुली किताब नहीं बनें।
हर युवा लड़की को निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर ही व्यवहार करना चाहिए:-
** किसी परिचित पुरूष के आने पर जब घर में कोई बड़ा उपलब्ध नहीं हो तो आप केवल उस परिचित पुरूष से औपचारिकता पूर्ण व्यवहार ही करें।
** परिचित व्यक्ति के साथ खासतौर पर जब उसका चरित्र आपको संदिग्ध सा लगे तो कोई भी बात करने से बचें।
ह्न यदि परिचित व्यक्ति जिसकी रंगीन मिजाजी के बारे में आपने भी सुन रखा हो, जाने अनजाने आपके घर आए तो आप उसके सामने आने से कतरायें और यदि आपको वहां जाना ही पड़े तो तीन-चार मिनट बाद वहां से उठ जायें।
** यदि कोई व्यक्ति जो आपका अधिक परिचित हो, दरवाजे पर दस्तक देता है और वह व्यक्ति चिपकू या वाचाल किस्म का हो तो घर में जिम्मेदार मां या पिता के नहीं होने पर आपको चाहिये कि आप अपने छोटे भाई या बहिन से बाहर से ही यह कहलवा दें कि घर में कोई उपस्थित नहीं है।
** अत्यधिक परिचित व्यक्ति के घर आने पर उसके सामने आप ज्यादा नहीं बोलें और कुछ पूछने पर मात्र हां या न में ही जवाब दें।
** किसी अत्यन्त परिचित व्यक्ति के समक्ष अपनी कमियों व विशेषताओं का पाठ न करें।
** अपनी किसी परिचित सहेली के गहरे राज भी किसी अन्य व्यक्ति या महिला तक को नहीं बतायें क्योंकि ऐसा भी हो सकता है कि आपके बताये तथ्यों को वह वहां और बढ़ा चढ़ा कर पेश करे जिससे आपको सहेली का सिर नीचा हो और समाज में वह निन्दा का पात्र बने।
अतिथि ऐसी ओछी हरकतें कर जाते हैं जिन्हें शब्दों में व्यक्त करना कठिन होता है और आने वाला अतिथि दैत्य तुल्य बन युवा लड़की को भटकाव की ओर डाल सकता है।
कहना न होगा कि यदि आप इन बातों को ध्यान में रखकर व्यवहार करेंगी तो आप सबके सम्मुख विशेषकर किसी परिचित व्यक्ति के सामने ‘खुली किताब’ होने से बच सकेंगी और सुरक्षित रह पायेगी।
—————–रेणुका श्रीवास्तव




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