बच्चे का डर दूर करें

बच्चों का काल्पनिक खतरों से डरना एक आम समस्या है। प्रायः बच्चे भूत-प्रेत, बाबाओं, कुत्ता, बिल्ली, अंधेरे आदि से डरते हैं। इनकी अनुपस्थिति में भी बच्चों के मन में इनके प्रति भय रहता है। इस प्रकार का डर उन्हें दब्बू बना देता है, उनमें आत्मविश्वास की कमी आ जाती है तथा उनके व्यक्तित्व का संतुलित विकास नहीं हो पाता।
अनावश्यक रूप से बच्चों के भयभीत होने के अनेक कारण हैं। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक यदि गर्भावस्था में माता अनावश्यक रूप से भयभीत रहती है तो इसका प्रभाव बच्चे पर भी पड़ता है। ऐसी स्थिति में बच्चा जन्म के बाद से ही प्रायः बिना वजह डरने लगता है। डरावने टी. वी. धारावाहिक देखकर, डरावनी कहानियां सुनकर भी बच्चे के मन में डर बैठ जाता है।
प्रारंभ में बच्चा असहाय होता है और उसे अनेक बातों का ज्ञान नहीं होता। ऐसे में बच्चे का डरना स्वाभाविक है किंतु समय रहते बच्चे के मन से डर दूर न किया जाये तो आगे चलकर यह स्थायी रूप धारण करने लगता है।
प्रायः यह देखा गया है कि माता-पिता रोते हुये बच्चे को चुप कराने या सुलाने के लिए अनावश्यक रूप से डराते हैं जिससे बच्चा भयभीत रहने लगता है।
यदि बच्चा कुत्ते बिल्ली से डरता है तो उसे किसी पालतू कुत्ते या बिल्ली के पास ले जाकर पुचकार कर दिखा देना चाहिए। ऐसा करने पर उसके मन से भय निकल जायेगा। बाबाओं को दूर से दिखाकर समझाएं कि वह भी इंसान है उनसे डरना नहीं चाहिए अंधेरे से डरने वाले बच्चों को बार-बार अंधेरे स्थान पर प्रकाश करके विश्वास दिलवाना चाहिए कि अंधेरे स्थान पर कुछ भी अलग नहीं है।
बच्चे को डरावने टी. वी. धारावाहिक न देखने दें। इससे उसके मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। डरने वाले बच्चे का मजाक न उड़ायें बल्कि उसके मन में वीरता एवं साहस पैदा करें तथा उसके आत्म-विश्वास को बढ़ायें। (उर्वशी)

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