बनना चाहती हैं स्मार्ट पैकेज

आज की युवा पीढ़ी बहुत एंबीशियस है। ‘छूना है आसमान, ‘सफलता अपनी मु_ी में, ‘आई एम द बेस्टÓ, ‘हम में हैं दमÓ जैसा मंत्रोच्चार करती वह निरंतर आगे बढऩे को तैयार हैं।
मन में जज्बा हो, अवसर हों, बदन में ताकत हो, फिर कौन इन अपनी उफनती नदियों को रोक सकता है। हां, मंजिल का पता जरूर होना चाहिए। व्यक्तित्व का विकास भी चहुंमुखी हो, यह वक्त की मांग है। केवल एक फील्ड में मास्टरी कर ली तो यह सक्सेस की गारंटी नहीं होगी। अगर होना है कामयाब तो स्मार्ट पैकेज बनना होगा।
पर्सनैलिटी हो इम्प्रेसिव:- केवल डीलडौल में बड़े होने या ब्रांडेड आयटम्स धारण कर लेने से ही आप इम्प्रेसिव नहीं लगने लगते। आपकी बोलचाल, हावभाव, नॉलेज एंड जनरल अवेयरनेस सभी चीजें काउंट होती हैं। ड्रेसअप आप उसी तरह हों जो आपके व्यक्तित्व के साथ फिट बैठे। आपके फील्ड के मुताबिक लगे। अपनी कमियां जानकर उसे इंप्रूव करें। केवल उस पर अफसोस ही न करते रह जाएं।
आपके प्लस पॉइट्स:- प्लस माइनस पॉइंट्स सभी में होते हैं। प्लस पॉइंट्स एनकैश करें। ये आपकी पहचान बनाने में सहायक होंगे। उन पर गौरवान्वित होने में न झिझकें। ये आपका मॉरल बूस्ट करते हैं, आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, जो कि स्मार्ट पैकेज बनने की पहली शर्त है।
नॉलेज अपडेट रखें:- मानसिक विकास के लिए पढऩा जरूरी है। आज हर फील्ड में नये-नये आविष्कार, नई जानकारियों की भरमार है। चाहे आपको स्पोटर््स में, मेडिसिन में उदाहरण के लिए, भले ही जरा भी दिलचस्पी न हो लेकिन फिर भी लेटेस्ट जानकारी होनी चाहिए। आई टी के इस दौर में जानकारियों के लिए आपको कहीं दूर आश्रम में जाकर नहीं रहना है। घर बैठे रिमोट के बटन दबायें। डिस्कवरी, न्यूजचैनल जैसे चैनल्स हैं, आपको ताजा खबरों और जानकारियों से अपडेट रखने के लिए।
व्यवहार कुशल होना जरूरी:- पढ़ाई लिखाई आपको केवल डिग्री प्रदान करती है, व्यवहार कुशलता नहीं सिखाती। यह तो आपको स्वयं ही अपने प्रयत्नों से हासिल करनी पड़ती है। कुछ तो आप की अपब्रिंगिंग का असर होता है, कुछ सीखना पड़ता है। आप जिनके व्यवहार को प्रशंसा की दृष्टि से देखती हैं, इम्प्रेस होती हैं, उन्हें अपना रोल मॉडल बनाएं। सबसे जरूरी है जीवन के प्रति पॉजिटिव एटीट्यूड। दूसरी बातें अपने आप फॉलो होती हैं।
मन अच्छा हो तो व्यवहार में झलकता है, यह मानकर चलें। आलोचकों से चिढ़ें नहीं बल्कि उनका खुले मन से स्वागत करें। ये आपको अपने को सुधारने में प्रेरक बन जाते हैं। अपनी भाषा संतुलित और मधुर रखें। कर्टियस रहें। कभी बातों को कुशलता से मोडऩे की जरूरत होती है। स्पष्टवादी बनने के फेर में हर किसी को ऑफेंड भी न करें। कॉम्पलीमेंट देने में कभी कंजूसी न करें। बेवजह किसी की आलोचना करने से बचें। दूसरों को पर्सनल स्पेस दें और अपनी टेरिटरी में भी अतिक्रमण न होने दें।
लक्ष्य और योजनाबद्धता:- सफल होने के लिए लक्ष्य तय करें अपनी योग्यतानुसार फिर आगे बढ़ें। प्रायर्टीज तय कर लें। योजनाबद्ध तरीके से चलने पर ही लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है।
एक हद तक हर कार्य योजनाबद्ध तरीके से करना अच्छी आदत है। एक डायरी, नोटबुक रख लें। ये सुविधाजनक है। भूलने के चांस नहीं रहेंगे और आपको दिमाग पर अनावश्यक जोर भी नहीं डालना पड़ेगा जो निस्संदेह ऊर्जा का अपव्यय होगा।
अपनी कार्यक्षमता जांचें। अपने पर विश्वास रखें। क्रियाशीलता का मतलब है कॉनफिडेंस। सीखने को हमेशा तत्पर रहें अच्छे श्रोता बनने का यही फायदा है आप सुनकर बहुत कुछ सीख सकते हैं। एक अच्छा श्रोता बनकर ही आप अच्छे वक्ता बन सकते हैं।
आपने अक्सर टी वी व मैग्जींस पेपर्स में स्मार्ट पैकेजेज की तस्वीरें देखी होंगी। क्या सबसे ज्यादा लुभावनी आपको उनकी दिलकश मुस्कान नहीं लगती? यस! तो देर किस बात की। शीशे के सामने खड़े होकर आप भी मीठी सी मुस्कान की प्रैक्टिस कर लें। ऐसा चेहरा बहुत अपीलिंग लगता है। प्रैक्टिस करते ये आपकी आदत बन जायेगी। यूं होगा एक स्मार्ट पैकेज मुकम्मल।
—————— उषा जैन शीरीं




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