बेटी का जन्म अपराध नहीं

औरत आज हर क्षेत्र में प्रगति कर रही है, फिर भी वह लाचार है। उच्चवर्गीय एवं मध्यमवर्गीय परिवारों में किसी लड़की के जन्म को भले ही अब बोझ न समझा जाता हो परन्तु निम्नस्तरीय परिवारों में लड़की का जन्म अभी तक अपराध ही है। शहर हो या गांव, ऐसे परिवारों की कोई कमी नहीं है जो लड़के की अपेक्षा लड़की को हर स्तर पर कम समझते हैं।
हमारे देश की आधी आबादी महिलाओं से ही है जबकि उनके अधिकार आधे भी नहीं। भले ही सरकार या कोई संस्था उनके लिए हर कदम पर साथ होने का दावा करें, फिर भी वे अपने भाग्य को कोसती हैं। बेटी का भविष्य कैसा हो, यह तो अशिक्षित माता-पिता सोचते नहीं। हमारे संविधान में महिलाओं के लिए कई अधिकार ऐसे बनाये गये हैं जो उसके जन्म को व्यर्थ नहीं जाने देंगे लेकिन अशिक्षित परिवारों में रहने वाली बालिकाएं अपने अधिकारों का उपयोग कैसे करें जब वे इन अधिकारों को जान ही नहीं पातीं।
शिक्षित या उच्चवर्गीय परिवारों में जब किसी लड़की का जन्म होता है तब लड़की के जन्म की तरह जश्न होता है। वहीं अशिक्षित एवं गरीब परिवारों में बेटी का जन्म आपत्तिस्वरूप माना जाता है। हर क्षेत्र में नवजात बालिकाओं हेतु सरकारी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं जो उनकी शिक्षा और परवरिश में इस्तेमाल करने के लिए प्रदान की जाती हैं। लड़की की शिक्षा के लिए सरकारी माध्यमों में उचित छात्रवृत्ति दी जाती है फिर भी ये परिवार अपनी बेटियों को शिक्षा ग्रहण नहीं करने देते।
पैसे के अभाव में बचपन में ही ऐसे परिवार इन मासूम बालिकाओं को धनोपार्जन करने के लिए विभिन्न कामों में लगा देते हैं। घर से बाहर कागज-चुगने का, अखबार बेचने का, सब्जियां या फल बेचने का काम करती हैं या किसी घर में बर्तन साफ करना और झाडू पोंछा करना ही इनकी किस्मत बन जाती है। घर आने पर भी घर का काम करके अपना जीवन इसी तरह बिता देती हैं।
यदि मां-बाप इन्हें किसी प्राइमरी स्कूल में दाखिला भी दें तो इन्हें पढऩे के लिए न समय दिया जाता है, न सुविधाएं। बेवजह के ताने दिये जाते हैं।
बात शिक्षा तक ही सीमित नहीं है। हर स्तर पर बेटियों के साथ भेद-भाव किया जाता है। बेटी के जन्म को गरीब परिवारों में सह लिया जाता है लेकिन सम्पन्न और शिक्षित परिवारों में जन्म से पहले ही बेटी को मार दिया जाता है। भ्रूण हत्या के इस तरह के निर्मम कार्य को रोकने के लिए सरकार ने कई कदम भी उठाए हैं परन्तु परिणाम सुखद तब भी नहीं हुए।
 कोई जन्म से पूर्व, कोई जन्म के तुरन्त समय बाद बेटी की हत्या कर देते हैं। अन्य में से कितनी ही सामाजिक बुराइयों और पारिवारिक तनाव से आत्महत्या कर लेती हैं जिसका परिणाम होता है लड़कियों की जनसंख्या में कमी पर यह कोई नहीं मानता कि बेटी अपने जन्म की जिम्मेदार स्वयं नहीं, फिर उसका जन्म अपराध क्यों है। ——————-(उर्वशी)

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