मतभेद न बन जाए मनभेद

पति-पत्नी का रिश्ता एक महत्त्वपूर्ण रिश्ता है परन्तु समाज में शायद कोई रिश्ता ऐसा नहीं जहां आपस में मतभेद न हो। यहां तक कि पति पत्नी का रिश्ता भी इसमें शामिल है।
पति पत्नी में कभी-कभी मतभेद होना स्वाभाविक है और इस मतभेद के बाद दोनों में प्रेम और भी बढ़ जाता है किंतु पति पत्नी के बीच शब्द युद्ध रूपी आपसी मतभेद जब आक्रामक सीमा पर पहुंच जाता है तो दोनों के आपसी रिश्तों में खटास पैदा हो जाती है। हंसता खेलता परिवार टूटने की स्थिति तक में जा पहुंचता है और आपसी कटु शब्दों की यह चिंगारी कभी-कभी शोला बनकर दांपत्य जीवन को बरबाद कर देती है।
असल में दांपत्य जीवन में तकरार होने का मुख्य कारण आपसी अहंकार है। अहंकार के चलते ही पति पत्नी के बीच मामूली बातें गैर मामूली बन जाती हैं। अक्सर मतभेद की स्थिति में पति का हाथ कभी-कभी पत्नी पर उठ जाता है। इसी तरह पत्नी का मूड भी खराब हो जाता है और वह कोई गैरजिम्मेदाराना फैसला ले लेती है। प्रस्तुत हैं कुछ ऐसे सुझाव जिन पर अमल कर मतभेद की स्थिति को या तो शुरूआत में ही खत्म किया जा सकता है या फिर इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जब कभी आपकी उनके साथ मतभेद की स्थिति पैदा हो जाए, तब इस बात का हमेशा ख्याल रखिये कि आपके मतभेद का मुद्दा वर्तमान काल तक ही सीमित रहे। ऐसे समय अतीत की किसी घटना को न दोहरायें। आपकी ऐसी प्रतिक्रिया आग में घी डालने जैसा कार्य करेगी।
पति-पत्नी को हमेशा एक दूसरे की जरूरतों व भावनाओं की कद्र करनी चाहिए। कोई कार्य करने से पूर्व पति-पत्नी आपस में सलाह मशविरा कर लें तो उचित रहेगा। आपस में हर विवादास्पद मुद्दे पर शालीनतापूर्वक खुलकर बात करें। आपसी संवाद से गलतफहमी दूर होती है। एक दूसरे की बातों की कद्र करें।
यदि एक दूसरे की कोई बात सही न लगे तो उस पर आपत्ति प्रकट करें परन्तु शालीन ढंग से किसी कार्य के गलत होने पर या गलती हो जाने पर माफी मांगना न भूलिये। मतभेद के बाद पिछली बातों को भूलकर एक नयी शुरूआत कीजिए। अपने जीवन साथी के प्रति किसी तरह का मलाल मत रखिये। इसी तरह पति को भी अपनी जीवन संगिनी के प्रति किसी तरह का गिला-शिकवा नहीं रखना चाहिए।           (उर्वशी)

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