रूपए-का पहिया, चलता ही जाए

पुरातन में समाज में वस्तुओं के आदान-प्रदान से समाज चलता था। बाजार में नोट, सिक्के नहीं प्रचलित थे। गाय देकर बैल ले आते या गेहूं देकर घोड़ा खरीद जाते थे। कौडिय़ां भी सिक्कों की जगह चलती रही। कुछ वर्ष पूर्व गांवों में यह प्रथा भी थी कि गेहूं देकर दुकानदार से चावल लिए जाते थे।
गलियों में लोहा खरीद कर प्लास्टिक के बर्तन दे जाते हैं। पुराने कपड़े ले कर स्टील के बर्तन दे जाते हैं। पीतल दे कर खाद्य पदार्थ लिए जाते हैं।
सदियों पहले सोने चांदी की मुहरें या सिक्के प्रचलित थे। 7०० ईसा पूर्व तुर्की के राजा ने 75 प्रतिशत सोना एवं 25 चांदी ढाल कर सिक्के प्रचलित किए लेकिन बाद में सोने के सिक्कों की जगह तांबे के सिक्के प्रचलित होने लगे।
सिक्कों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना कठिन या फिर कागज एवं छपाई की खोज के बाद चीन देश ने 119 ईसा पूर्व-कागज के नोट छापने शुरू कर दिए। स्वीडन ने 1661 को नोट छापने शुरू किए। भारत में प्रथम करंसी नोट शेरशाह सूरी के राज्यकाल में छपा।
संसार के हर राष्ट्र की करंसी नोट मुद्रा एवं उसका मूल्य अलग-अलग निर्धारित है। अमेरिका में डालर, भारत में नोट रूपया, ब्रिटेन में पाउंड, जापान में येन, रूस में रूबल, फ्रांस में फ्रैंक, यूनान में डे्रम्का नाम की करंसी चलती है। भारत के 68 रुपये एक डालर के बराबर है। नेपाल के दो रूपये भारत के एक रूपए के बराबर हैं। ब्रिटेन का पाउंड, भारत के 88 रूपए के बराबर हैं।
मुद्रा वस्तुओं और पदार्थों के आदान प्रदान के लिए बनाई जाती है। भारत में तांबे के सिक्के प्रचलित थे जो अब बंद हैं। चांदी का रूपया बीसवीं शताब्दी के शुरू के दौर में चलता था।
सिक्के बाजार से नदारद होते जा रहे हैं। उनकी धातु को गला कर नए पदार्थ बनाए जा रहे हैं।
चीन, एशिया, तुर्की में 77० ईसा पूर्व भी सिक्कों का रिवाज था। लाओस एक ऐसा देश है जहां आज तक कोई सिक्का नहीं बना है।
इंग्लैंड का के बैंक का सबसे पुराना छपा नोट 555 पौंड का है। संसार में सबसे बड़ा नोट चीन की मिग वंशावली का है। इसका मूल्य एक क्थान है। यह 1368 में बना। इसका आकार 22म3० सेंमी. था। सबसे छोटा नोट रुमानिया में 1917 में बना था। इसका आकार  2.75म् 3.8 सेमी था। जर्मनी ने इससे भी छोटे आकार का नोट बनाया। इसका आकार 18म18.5 मि. मी था।
सबसे अधिक मूल्य का नोट अमेरिका के रिजर्व बैंक के 1०,००० डालर या पांच लाख रू. के बराबर एक नोट है। 1944 के बाद ये नोट बंद हो गए।
इसी प्रकार इंग्लैंड ने दस लाख पाउंड का नोट निकाला। भारत में दस हजार का नोट चलता था जो बाद में बंद कर दिया गया। 1००० रुपये के नोट 2०15 चलते थे जो 2०15 में बंद कर दिये गए। चेक बुक की भांति लोग नोटों की गड्डियां जेब में रखते थे।
भारत में स्वतंत्रता से पहले ढाई रूपए के नोट चलते थे जो बाद में बंद कर दिए गए। वे सात बार छपे। 
संत तुकाराम जी मराठी संतों के सरताज माने जाते हैं। उन्होंने शिवाजी महाराज को धर्म की राह दिखलाई। Óफरवरी 2००3 में संत तुकाराम की स्मृति में स्मारक सिक्के जारी किए गए जो 2,5,1० 5० व 1०० रू. के थे।——————- (उर्वशी)

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