शरीर शोधक है करेला

सब्जियों की श्रेणी में आने वाला करेला कड़वे स्वाद के कारण विख्यात है। इसकी कई प्रजातियां बाजार में मिल जाती हैं। सभी समान गुणधर्म की होती हैं। यह सब्जी, सलाद, जूस, अचार या सूखाकर चूर्ण बनाकर उपयोग किया जाता है। इसका कड़वा होना ही इसे गुणकारी बनाता है। भारत में इसे उपवास के पहले एवं बाद में खाने की परंपरा है। यह बुखार में दवा की भांति काम करता है। गलत खानपान से शरीर में जमा हुए विष को दूर करता है।
यह टानिक जैसा है। यह पाचन तंत्रा को मजबूत करता है। यह रक्त शोधक है तथा रक्त एवं चर्म विकार दूर करता है। लिवर एवं पाचन तंत्रा के विकारों को ठीक करता है। यह हर तरह से शरीर शोधक है। डायबिटीज के मरीज इसके लाभ के लिए सेवन करते हैं। इसमें प्राकृतिक इंसुलिन पाया जाता है। यह रक्त शर्करा स्तर को कम करता है। मधुमेह के रोगी अपने शुगर के स्तर को ध्यान में रखकर इसका सेवन करें। विज्ञान एवं शोध अध्ययन भी इसके सभी गुणों को प्रमाणित करते हैं।
भावनाओं की अनदेखी से दिल को नुकसान
क्रोध करने वाले ‘ए’ पर्सनलिटी के माने जाते हैं। इनके हृदय को खतरा रहता है। ये बी. पी. पीडि़त हो सकते हैं किंतु क्रोध करने से दिल को नुकसान नहीं पहुंचता बल्कि भावनाओं की अनदेखा करने से दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लोग स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। समय-समय पर बी.पी और ब्लड कोलेस्ट्राल का स्तर जांच कराते रहे। सही मात्रा में व्यायाम करें। व्यायाम से रक्तसंचार ठीक रहता है जिससे हृदयाघात जैसी स्थिति से बचाव होता है।
फल सब्जी भी इसमें मददगार होती हैं। पालक, पत्ता, गोभी आदि उपयुक्त हैं जबकि ट्रांस फैट से नुकसान होता है। इन्हें कुकीज एवं चिप्स से बचना चाहिए। महिलाओं को दिल की तकलीफ का पता बहुत बाद में चलता है। सीने में दर्द दिल के दौरे के अलावा अन्य कारण से भी होता है। सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ, पेट में दबाव, गले में सख्ती आदि लक्षण दिल के दौरे के कारण हो सकते हैं।
शरीर में लचीलापन बनाये योग द्वारा
शरीर में लचीलापन होना अत्यंत जरूरी है क्योंकि इसके होने से कोई भी काम आसानी से किया जा सकता है। योग इस लचीलेपन को बनाये रखने का उत्तम स्रोत है। योग द्वारा हम शरीर से अतिरिक्त वसा का अवशोषण कर शरीर को स्वस्थ बना सकते हैं परंतु ध्यान रहे कि योग शांत मन व किसी योग गुरू की सलाह से ही करें।
ज्यादा खाने से खतरा
सीमित मात्रा में खाने से व्यक्ति दीर्घजीवी बनता है। जरूरत से कम खाने पर कुपोषण का शिकार होता है जबकि ज्यादा खाने पर बी.पी., शुगर, मोटापा व आघात आदि का सामना करना पड़ सकता है। अधिक खाने से याददाश्त कमजोर होती है। डिमेंशिया और अल्जाइमर्स जैसी बीमारियां जो दिमाग से जुड़ी हैं, होती हैं, अतएव कम खाएं और लंबी आयु तक जीवित रहें।
अनार से बूढ़े होने की गति
धीमी हो जाती है
अनार एक बारहमासी फल है। यह रसदार मीठा फल सदैव दवा की भांति रोगी को लाभ पहुंचाता है। इसका छिलका कसैला होता है। छिलके से पेचिश, आंव एवं दस्त की शिकायत दूर होती है जबकि इसके मीठे दानों से दिल मजबूत होता है। यह रक्त बढ़ाता है। इससे त्वचा की जवानी बनी रहती है। शोध के मुताबिक यह बूढ़े होने की गति को धीमी कर देता है। यह तनाव कम करता है। यह हर तरह से आयु बढ़ने की गति को धीमी कर उम्र को बढ़ाता है और जवान रखता है।
मल्टी विटामिन से स्वास्थ्य को खतरा
कमजोरी, बीमारी एवं बात बात में मल्टी विटामिन लेने वाले सावधान हो जाएं। यह पूरक के रूप में लेने पर इसकी गोली या कैप्सूल से लाभ की बजाय स्वास्थ्य को नुकसान भी हो सकता है। फ्रांस के नैन्सी यूनिवर्सिटी के शोध के मुताबिक पूरक मल्टी विटामिन से दिल की बीमारी एवं कैंसर के होने खतरा बढ़ जाता है, अतएव मल्टी विटामिन सोच समझकर लें। खान पान पर ध्यान दें।
शहद दीर्घायु बनाता है
मधुमक्खियां फूलों से रस चूस कर उसे शहद के रूप में अपने छत्तों में संग्रहित कर रखती हैं। यह शहद दवा की तरह काम करता है। यह नवजात के लिए भी लाभदायी है। यह आयुर्वेद वर्णित महत्त्वपूर्ण वस्तु है। यह किसी भी दवा के साथ मिलकर उसके प्रभाव को बढ़ाता है। यह मोटापे को घटाता है। नींबू पानी के साथ मिलकर बी पी नियंत्रित करता है। शहद त्वचा में लगाने से त्वचा चुस्त व जवां रहती है। दैनिक एक गिलास पानी के साथ एक चम्मच शहद के सेवन से व्यक्ति दीर्घायु बनता है।
अकेलेपन से अवसाद,
तनाव, मोटापा
एकाकी जीवन जीने वाला अपने भाव अभिव्यक्ति के अभाव में अवसाद एवं तनाव में डूब जाता है। इस अवस्था में वह आवश्यकता से अधिक खाता है और वजन वृद्धि एवं मोटापे का शिकार होता है। हयूसन में किए एक शोध के मुताबिक एकाकी जीवन जीने वाले तनाव में भोजन को अपना साथी बना लेते हैं जिससे वजन, मोटापा बढ़ जाता है।
लौकी से मिलता है आराम
व संतुष्टि
लौकी सब्जी प्रजाति का एक बारह मासी फल है। इसे कुछ स्थान पर दूधी के नाम से भी जानते हैं। यह सब्जी, सलाद, रायता, जूस, हलवा, लड्डू आदि बनाने के काम आती है। इसका परांठा भी बनाया जाता है। जूस से हृदय को लाभ मिलता है। गला सुखाने वाली प्यास की स्थिति में यह रक्षा कवच का काम करती है। दस्त के कारण होने वाले डिहाइडेªशन को दूर करती है। शरीर में सोडियम की कमी को पूरा करती है। मोटापा एवं वजन वृद्धि को रोकती है। यह खट्टे डकार को दूर करती है।
लौकी पेट को जलन को समाप्त करती हैं। यह सब्जी के रूप में सेवन करने पर आराम और संतुष्टि की अनुभूति प्रदान करती है। सावधानी मात्रा इतनी बरतें कि काटने के बाद पहले इसे चखकर देखें। सदैव मीठी लौकी का सेवन करें। चखने पर लौकी कड़वी लगे तो उसे उपयोग न करें क्योंकि वह जहरीली हो सकती है।
——— (स्वास्थ्य दर्पण)
——- सीतेश कुमार द्विवेदी

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