सब को भाये दुल्हन का श्रृंगार

एक समय था जब दुल्हनों को एक लंबे से घूंघट में छुपा कर शादी के मंडप में बिठा दिया जाता था। शादी में उपस्थित लोग दुल्हन की एक झलक मात्रा को तरसते थे। समय के साथ-साथ शादी करने के ढंग और दुल्हन के श्रृंगार में भी बदलाव आया है। श्रृंगार के प्रति दुल्हनों की सोच समझ में बहुत परिवर्तन आया है। इस का एक महत्त्वपूर्ण कारण दुल्हन द्वारा शादी वाले दिन ग्लैमरस दिखने की चाह है जो आज के परिवेश में चलचित्रों से प्रेरित है।
इस बदलते युग में शादी के दिन अगर दुल्हन ने अच्छा मेकअप किया हो, अच्छे कपड़े और आकर्षित आभूषण पहन रखे हों तो हमारी नजर अनायास ही उस पर टिक जाती है। उसके व्यक्तित्व में चार चांद लग जाते हैं।
दुल्हन ने चाहे कपड़े अच्छे पहने हांे, ज्वैलरी अच्छी पहनी हो, मेकअप अच्छा किया हो, अगर उसकी चाल में नजाकत न हो तो सारा आकर्षण ही चौपट हो जाता है। इस लिए दुल्हनें शादी वाले दिन सजने के लिए अपनी पसंद के अलग-अलग ढंग अपना रही हैं। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि शादी वाले दिन ग्लैमरस दिखने के लिए दुल्हनें बहुत ज्यादा टेंशन लेने लगी हैं।
दुल्हनें एक सपना संजोती हैं कि शादी वाले दिन मैं कैसी लगूंगी, सभी की नजरें मेरी तरफ हांेगी, मेरा मेकअप कैसा होगा, मेरे कपड़े कैसे होंगे, मेरा हेयर स्टाइल, मेरे जूते व सैंडल कैसे होंगे, मेरी मेहंदी कैसी होगी, मेरी लिपस्टिक कैसी होगी आदि-आदि इन सब बातों को ध्यान में रख कर दुल्हनें आजकल अपनी पोशाक से मैच करते हुए चूड़े पहनती हैं।
अलग-अलग रंगों के पत्थरों से सजी डिजाइनर पायल अब दुल्हनों को खूब भा रही हैं। वैसे दुल्हनों में अब जोड़े की जगह एक पैर में पायल पहनने का ट्रेंड ज्यादा है। दुल्हनें सोने चांदी के बिछुओं के साथ-साथ मैटल व फंकी डिजाइंस के बिछुुए भी पहन रही हैं।
कुछ समय पहले नथनी आउटडेटेड हो चुकी थी लेकिन इन दिनों यह दुल्हनों द्वारा विभिन्न रंगों में पसंद की जा रही है। आज यह कुंदन मोती, कीमती पत्थर और हीरे में पसंद की जानें लगी हैं। मेहंदी जिस में कलश और शहनाई का चित्रा अंकित हो, दुल्हनों द्वारा पहली पसंद बनती जा रही है।
शादी के दौरान हर तरफ चमक दमक और रोशनी का नजारा होता है। ऐसे में दुल्हनें मेकअप भी उसी के अनुरूप करवाती हैं। नेट का घाघरा व खुले कंधे की चुस्त चोली, आभूषणों का सही मेल, चुनरी लेने का निराला ढंग, दुल्हन को आकर्षक बनाता है।
सच तो यह है कि जिन बातों, इच्छाओं व मन की भावनाओं को दुल्हनें शब्दों के माध्यम से नहीं कह सकती, वे अपने शरीर के हाव-भाव से बिना कुछ कहे बहुत कुछ कहने की इच्छा रखती हैं और व्यक्तित्व का अहम हिस्सा अपनी मुस्कान बिखेरती हैं जिस के बिखरने पर दुल्हन का सौंदर्य तो फैलता ही है, साथ ही यह दुल्हन के आंतरिक व्यक्तित्व के बारे में भी बताती है। शर्मीली मंद मुस्कान दुल्हन के व्यक्तित्व को चार चांद लगाती है। (उर्वशी)

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