साझेदारी का रिश्ता है सुखी दांपत्य

विलास आज दफ्तर से आया तो बेहद उखड़ा हुआ था। रोज की तरह आते ही उसने न टुन्नू को गोद में उठाकर प्यार किया, न सुलभा से गर्मा-गर्म चाय की फरमाइश की। सीधे बेडरूम में जाकर बगैर जूते उतारे ही वह पलंग पर लेट गया। सुलभा जब चाय नाश्ता लेकर कमरे में आई तो वह गहरे सोच में डूबा छत की ओर टकटकी लगाये देख रहा था। माथे पर पड़ी सलवटें उसके तनावग्रस्त होने का परिचायक थीं।
सुलभा ने जब प्यार से उसका सिर सहलाते हुए पूछा ‘क्या बात है आज आप परेशान लग रहे हैं? तो विलास ने एकाएक उसका हाथ कसकर पकड़ अपने गालों से सटाते हुए चूम लिया और इसके साथ ही जैसे उसका सारा तनाव छंट गया।
प्यार के दो मीठे बोल जहां पति-पत्नी के आपसी संबंधों को पुख्ता करते हैं, जीवन को जीने योग्य भी बनाते हैं। एक सफल-सुखी वैवाहिक जीवन बिताने वाले दंपति प्यार की अभिव्यक्ति में हिचकिचाहट महसूस नहीं करते। यह अभिव्यक्ति तो स्पाटेंनियस होती है। इसके लिए किसी प्रयत्न की आवश्यकता नहीं होती। वैवाहिक जीवन में जहां सेक्स की महत्ता है वहां स्पर्श, चुंबन, आलिंगन, प्रेम की रसभीनी मधुर बातचीत का महत्त्व भी कम नहीं। ये शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर प्रेमी युगल को असीम तृप्ति से भर देती है।
वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी द्वारा एक दूसरे की हर समय की टोका-टाकी जीवन में कटुता भर देती है इसलिए इस बात का उन्हें विशेष ध्यान रखना चाहिए कि आलोचनात्मक नेगेटिव रूख न अपनायंे। वास्तव में देखा जाए तो आलोचना करना ही सारे झगड़े-फसाद की जड़ है। हां, स्वस्थ आलोचना का अपना महत्त्व है लेकिन उसके लिए हमेशा उचित मौका देखा जाना चाहिए तथा अत्यंत ही कुशलतापूर्वक बात कही जानी चाहिए जिससे आपके जीवनसाथी को बुरा न लगे और उसे यह अहसास हो कि आप उसके वेल-विशर हैं, भला चाहने वाले हैं।
सफल दंपति एक दूसरे की प्रशंसा करने में कभी कंजूसी नहीं बरतते। प्रशंसा से जहां मनोबल बढ़ता है अहं की तुष्टि होती है, स्वयं पर आत्मविश्वास बढ़ता है वहीं वैवाहिक जीवन प्रशंसा के फूलों से सदाबहार बना रहता है।
एक-दूसरे के आचार विचार, गहनतम भावनाओं से उन्हें अच्छी तरह परिचित हो जाना चाहिए। यह एक-दूसरे को समझने के लिए अति आवश्यक है। उसी तरह एक-दूसरे में अटूट विश्वास का होना भी जरूरी है क्योंकि संदेह का घुन वैवाहिक जीवन को खोखला कर देता है।
दांपत्य का प्यार कॉलेज जीवन के रोमांस की तरह यथार्थवादी ‘प्रथम निगाह वाला प्यार‘ नहीं होता। यह बरसों में एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते-बूझते हुए विकसित होता है। त्याग, सहनशीलता, उदारता व समझदारी सफल दांपत्य के लिए जरूरी है। वास्तव में गुण-दोष से परे कोई भी इंसान नहीं होता। समझदार दंपति अपने जीवन साथी को वह जैसे भी है-संपूर्ण रूप से अपनाते हैं। उनकी कमजोरी पर सहानुभूतिपूर्ण विचार कर उसे समझने की कोशिश करते हैं न कि इसके लिए उनसे नफरत कर उनसे झगड़ा करते हैं।
प्यार की शिद्दत यहां भी लैला-मजनंू से कम नहीं होती। पति केवल पति ही नहीं, वह एक प्रेमी भी होता है। सुखी दांपत्य के लिए यौन-संबंधों की उष्णता बरकरार रहनी चाहिए। पति-पत्नी के सारे मन-मुटाव और झगड़े दैहिक सुख की तृप्ति में घुल जाते हैं और जीवन पुनः मधुरता से भर जाता है। सहवास जहां पति-पत्नी में अंतरंगता स्थापित करता है वहीं उनके जीवन में उत्साह, उत्तेजना और जीवंतता भी भर देता है। सेक्स के प्रति रूचि एक स्वस्थ दृष्टिकोण सफल दांपत्य की निशानी है।
सुभाष के दौरे से लौटकर आने पर जब शिल्पा उनके लिए शीतल पेय लेकर पहुंची तो उन्होंने शिल्पा को बाहों में जकड़ते हुए सांकेतिक भाषा में एक आंख दबाकर रसिकता से पूछा-क्या ख्याल है? शिल्पा ने लजाते हुए मुस्कुराकर अपने को छुड़ाते हुए कहा ‘आप भी बस, अरे रात तो होने दीजिए।’ इस मधुर आमंत्राण की प्रतीक्षा में कहना न होगा सुभाष को कितना आनंद मिला होगा? पहल चाहे पति की ओर से हो या पत्नी की ओर से, सामने वाले को इस पहल पर पूरा ध्यान देना चाहिए। सुभाष और शिल्पा के सुखद दांपत्य का यह एक गुर है।
सेक्स के पूर्व दंपति को तनावमुक्त रहना चाहिए अर्थात सारी चिंता और परेशानी भूलकर एक-दूसरे में संपूर्ण रूप से खो जाने का, समर्पित होने का भाव होना चाहिए। पति या पत्नी को सिर्फ अपनी ही तृप्ति के बारे में नहीं सोचना चाहिए बल्कि अपने साथी के सुख का भी ध्यान रखना चाहिए।दैहिक मिलन, स्पर्शसुख व आलिंगन के लिए प्रेमी युगल सदा एकांत की चाह में रहते हैं, ऐसा एकांत जहां सिर्फ वे हों और उनका प्यार हो। प्यार का इजहार हो, बीच में कोई व्यवधान न हो।
इसे वैवाहिक जीवन की विडम्बना ही कहना चाहिए कि कई युगल मृत्युपर्यंत एक-दूसरे के लिए अजनबी ही बने रहते हैं। एक छत के नीचे रहते हुए भी मानसिक रूप से वे कोसों दूर होते हैं। उनके बीच सिर्फ काम की बातें होती हैं और बच्चे पैदा करना महज एक ‘बायलॉजिकल प्रक्रिया। उनका जीवन ऊब का पर्याय बन जाता है। इससे छुटकारा पाने के लिए उन्हें कोई रास्ता सुझाई नहीं देता, अपना जीवन निरर्थक जान पड़ता है। वहीं सार्थक जीवन जीने वाले दंपति भी हैं जिनके लिए वैवाहिक जीवन एक लम्बे हनीमून से कम नहीं होता। सालों साथ रहने पर भी वे एक दूसरे से ऊबते नहीं बल्कि जीवन की परिपूर्णता से तृप्त रहते हैं।
यूं तो सुख-दुख हर जीवन के साथ लगे रहते हैं लेकिन सुख जब तक कोई बांटने वाला न हो, अधूरा रहता है। उसी तरह दुख की तीव्रता साथी के बांट लेने से कम हो जाती है। दांपत्य एक साझेदारी का रिश्ता है जो उम्र भर के लिए होता है-आपसी प्रेम और विश्वास ही इसे मधुर बनाये रख सकता है, इसलिए प्रेम और विश्वास को बनाये रखना, उसे पोषण देना जरूरी है ताकि दांपत्य का पौधा हरा-भरा व जीवित रह सके। (उर्वशी)

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