साड़ी बांधने के हैं कई ढंग

गांव की गोरी हो या फिर शहर की अलबेली नारी, साडि़यों से कोई नहीं बच सकी है क्योंकि परंपरागत तथा कलात्मक साडि़यों ने ही भारतीय नारी की अलग से पहचान बनाई है। साड़ी के चयन के साथ अगर ब्लाउज के चयन में भी सूझबूझ का परिचय दिया जाए तो रंग-रूप में और भी निखार आ जाता है। साड़ी व्यक्तित्व के निखार को तभी उभार पाती है जब उसे सही ढंग से बांधा गया हो।

साड़ी ऊंची-नीची बंधी हो या फिर उसका पल्ला छोटा-बड़ा हो तो दोनों ही बातें फूहड़ता को प्रदर्शित करती हैं। भिन्न-भिन्न प्रांतों में साड़ी बांधने का तरीका अलग-अलग होता है जो वहां की संस्कृति कहलाती है। गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और बिहार प्रांतों में साड़ी के आंचल को सामने की ओर करके ‘सीधा पल्ला‘ साड़ी पहनने का चलन है। बांयें कंधे पर आंचल को पीछे की ओर पीठ पर डालकर ‘उल्टा पल्ला‘ साड़ी पहनने का फैशन लगभग पूरे देश में मान्य है।
बंगाल, असम और मणिपुर में बिना चुन्नटें डाले ‘आठपौर‘ तरीके से साड़ी बांधी जाती है तो दक्षिण में अठारह हाथ लंबी अयंगार साड़ी पहनी जाती है। महाराष्ट,ª केरल और गोवा में ‘कच्छमार‘ शैली वाली साड़ी पहने जाने के बावजूद उनका फर्क नजर आने लायक होता है। इन जगहों पर साड़ी को धोती की तरह ढेका खोंसकर पहना जाता है।

बांये कंधे पर पीछे पीठ पर आंचल डालकर साड़ी पहनने के आज के सर्वाधिक प्रचलित तरीके को प्रचार में लाने का श्रेय पारसियों को जाता है। हालांकि उनके साड़ी पहनने के तरीके में साड़ी का घेर काफी तंग होता था परंतु आज उस तरीके में भी बदलाव आ गया है।
बनारस की जामदानी, ब्रोकेड, पानेसर, बान्धनी, टिशू सिल्क, ओरगेन्जा, कोबरा सिल्क साडि़यां हों या दक्षिण भारत की परम्परागत चन्देरी, पटोला, क्रेप सिल्क, बटर सिल्क, टसर सिल्क साडि़यां या फिर मुम्बई की बेन्टेक्स खादी सिल्क, गढ़वाल बार्डर, पांच पट्टी, कोरा सिल्क व रंगीला प्रिन्टेड की ही साडि़यां क्यों न हों, सभी को सही तरीके से पहनने पर ही सुंदरता निखरती है। औरंगाबाद व मुर्शिदाबाद की विश्व प्रसिद्ध जरी रेशम, जर्दोजी और सूरमा, कलकत्ता की तांत कॉटन और मणिपुर की लाईटवेट प्योर मूंगा, ओरेन्ज प्रिन्टेड सिल्क साडि़यां भी शरीर पर तभी फबती हैं जब उन्हें ठीक तरीके से बांधा गया हो।
साड़ी बांधने से पहले पल्ला सेट कर लें। पल्ला सेट करने के लिए बार्डर के किनारे पर तीन या चार चुन्नटें दें, फिर आगे के बल देकर सेफ्टी पिन लगाते हुए साड़ी सेट करें। इससे साड़ी हिलेगी नहीं। विभिन्न अवसरों पर भिन्न-भिन्न तरीकों से साड़ी बांधकर आप अपनी खूबसूरती को बढ़ा सकती हैं।
उल्टे पल्ले की साड़ीः- आप अगर शाम की किसी पार्टी में जा रही हों या फिर शॉपिंग के लिए अथवा घूमने जा रही हों तो आकर्षक पल्ले किनारे वाली साड़ी को उल्टे पल्ले में बांधकर निकलिए। सबकी निगाहें आप की ही ओर होंगी।
सीधे पल्ले वाली साड़ीः- जब आप किसी की शादी में जा रही हों, बर्थडे पार्टी में जा रही हों तो रंगीली प्रिन्टेड साड़ी को सीधे पल्ले में बांधकर निकलिए। आप देखेंगी कि सभी का ध्यान आप ही की ओर होगा। इस प्रकार से बांधी गयी साड़ी आपकी खूबसूरती को और भी निखार देगी।
——– (उर्वशी)
——- पूनम दिनकर

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