स्नेह की महिमा

एक छोटा सा देश था मार्को। मार्को के राजा का नाम मार्कोनी था। वहां के राजा को गुलाम रखने का और उन पर जुल्म करने का बहुत शौक था। राजा का स्वभाव गुलामों के प्रति अधिक सख्त होने के कारण गुलाम उससे कभी भी खुश नहीं रहते थे।
एक दिन एक गुलाम हिम्मत करके राजा का महल छोड़ कर भाग गया। जब राजा को उसके बारे में पता चला तो उसने अपने दो सैनिक उस गुलाम को ढूंढने के लिए लगा दिए। गुलाम अपने आप को बचाते-बचाते जंगल में पहुंचा जहां उसे एक गुफा दिखाई दी। वह गुफा में छिप गया। उसने सोचा कुछ आराम भी कर लूंगा और यहां मुझे कोई ढूंढ भी नहीं सकता।
जैसे ही गुलाम गुफा में घुसा और उसने आंखें बंद की, उसे नींद आ गई। नींद खुलने पर उसने देखा कि सामने एक शेर अपना पंजा ऊपर किए बैठा हुआ है। गुलाम डर गया। उसे लगा, अब तो मैं बाहर भी नहीं जा सकता। मुझे शेर बाहर जाने नहीं देगा। वैसे भी बाहर जाने पर राजा के सिपाही वापिस राजा के पास ले जायेंगे।
गुलाम आंखें बंद किए कुछ देर बैठा रहा पर डर के मारे थोड़े समय बाद आंखें खोल कर देखता। शेर को सामने बैठे देख पुन: अपनी आंखें बंद कर लेता। एक बार गुलाम ने हिम्मत कर अपनी आंखें खोल ली तो क्या देखा कि शेर अपना पंजा ऊपर किए दया भरी दृष्टि से उसकी तरफ देख रहा
है।
गुलाम ने देखा, शेर के पंजे में कांटा चुभने पर खून आ रहा है। गुलाम ने हिम्मत बांध शेर के पंजे से कांटा निकाल दिया और अपनी कमीज के टुकड़े को फाड़ कर उसके पंजे पर बांध दिया। रात भर गुलाम शेर के साथ गुफा में रहा।
अगली सुबह जैसे ही गुलाम गुफा से बाहर निकला, उसने देखा, बाहर राजा के सिपाही खड़े थे। उन्होंने गुलाम को पकड़ा और महल चले गए। राजा मार्कोनी बहुत क्रोध में थे। उन्होंने उसे मृत्युदंड का आदेश दिया। अपने सिपाहियों को बोला – इसे शेर के पिंजरे में डाल दिया जायेे ताकि शेर इसकी बोटी बोटी खाकर इसे खत्म कर दे। राजा की बात का पालन किया गया। शेर के पिंजरे में गुलाम को बिठा दिया गया।
शेर गुलाम को पहचान गया और उसने गुलाम के हाथ को चाटना शुरू कर दिया कि इन हाथों से गुलाम ने शेर के कांटे को निकाला था। यह सब देखकर राजा हैरान हो गया। बाद में राजा को पता चला कि शेर ने उसे क्यों नहीं खाया। राजा को बहुत शर्मिन्दगी हुई और राजा ने गुलाम और शेर को आजाद कर दिया। राजा को महसूस हुआ कि स्नेह देने से स्नेह मिलता है। ——————- (उर्वशी)




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *