जब जायें बाहर खाना खाने

बाहर खाना खाना आजकल आम बात हो गई है। थोड़ी सी खुशी के अवसर पर बाहर खाना सबसे आसान लगता है। वैसे भी आजकल अक्सर पति पत्नी दोनों ही नौकरी करते हैं। जब भी थकान महसूस होती है, मन उदास होता है या कुकिंग का मूड नहीं होता तो लगता है कि चलो बाहर से आर्डर कर घर मंगवाते हैं या मूड सुधारने के लिए बाहर चले जाते हैं।
जब तक आप अकेले हैं तो बाहर जाना अधिक समस्या नहीं पैदा करता पर जब आप बहुत छोटे या किशोर बच्चों के माता पिता बन जाते हैं, तब जरूर यह कई बार समस्या का सबब बन जाता हैं क्योंकि बहुत छोटे बच्चों के साथ बाहर खाना मुश्किल हो जाता है और किशोर बच्चे बाहर जाना पसन्द कम करते हैं।
वे अपने गु्रप में जाना पसंद करते हैं। अगर चले भी जाते हैं तो उनके खाने के नखरे बहुत होते हैं। वीकेंड पर जन्म दिन, शादी की सालगिरह प्रमोशन होने पर पास होने पर जब आप बाहर खाने के लिए जाते हैं तो कुछ नियमों को निभाना जरूरी होता है। तो आइए जानें कि हमें किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए ताकि अपना मजा भी खारा न हो और बच्चे भी आनन्द उठा सकें।
=सबसे पहले यह निश्चय करें कि कितने लोगों ने खाने के लिए जाना है, सर्वप्रथम उन सबसे कन्फर्म कर लें। फिर कहां जाना है, कैसे पहुंचना है, ये सब पहले जान लें।
=फैसला करने के बाद जिस रेस्टोरेंट में जाना है, वहां पर बुकिंग करवा लें। और कुछ जानकारी भी एकत्रित करना चाहें तो फोन पर कर लें जैसे मैन्यू, पार्किंग, डेजर्टस आदि के बारे में।
=अगर आप सपरिवार जा रहे हैं तो घर से सोच कर जाएं कि किस रेस्टोरेंट में जाना है और किस प्रकार का खाना खाना है, मुगलाई, चाइनीज, साउथ इंडियन, गुजराती, वैष्णव आदि।
नियम जिनका पालन करें
=जब भी परिवार के साथ, संबंधियों के साथ या मित्रों के रेस्तरां में खाना खाने जाएं, वहां शराब का सेवन न करें, न ही सिगरेट पिएं क्योंकि ऐसा करना अशोभनीय लगता है।
=जब रेस्तरां में पहुंचें, जिस टेबल चेअर पर बैठकर खाना खाना हो, वहां आप अपने हाथों को टेबल पर न टिकाएं। हाथ अपनी गोद में रखें।
=खाना सबकी राय जानकर आर्डर करें। घर का एक ही सदस्य सभी आर्डर प्लेस करे। एकदम सभी चीजें आर्डर न करें क्योंकि इक_ा खाना आ जाने पर कुछ चीजें ठंडी होकर बेकार हो जाती हैं।
=क्र ॉकरी आ जाने पर नैपकिन अपनी गोदी में फैला लें ताकि कुछ खाना गिरे तो आपके कपड़े खराब न हों।
=खाना आने पर अपनी प्लेट में थोड़ा-थोड़ा खाना पहले डालें। आवश्यकता होने पर पुन: लें। खाना चखने के बाद ही नमक या मसाला डालना हो तो डालें।
=खाना धीरे-धीरे चबा कर खाएं। खाते समय आवाज न पैदा करें, न ही मुंह खोलकर खाना खाएं। जब मुंह में ज्यादा खाना हो तो उस समय बात न करें। छोटे टुकड़ों में खाना खाएं।
=बातों का टॉपिक ऐसा रखें कि सभी उसमें हिस्सा ले सकें। किसी भी तरह की बहस से बचें।
=कोई डिश लेनी हो और सर्विंग बाउल दूर हो तो जो उस बाउल के पास बैठा हो उसे अनुरोध कर अपने पास मंगवाएं।
=यदि कोई चम्मच, छुरी या कांटा नीचे गिर जाए तो उसे उठा कर एक तरफ रख दें और वेटर से फ्रेश लाने को कहें। अगर वो कुछ दूरी पर गिर जाए तो वेटर को कहें कि वे उसे उठा लें और आपके फ्रेश दे दे।
=कभी खाना टेबल पर गिर जाए तो ऐसे में चम्मच से उठा कर प्लेट के एक तरफ रख दें ताकि टेबल गंदा न लगे।
=कुछ लोग बाएं हाथ से खाना खाते हैं। उन्हें टेबल के कार्नर पर बैठाएं ताकि उन्हें और बाकी लोगों को कोई परेशानी न हो।
=मुंह में कुछ ऐसा आ जाए जिसे आप अंदर नहीं ले जा सकते तो वाशरूम में जाकर डस्टबिन में थूकें और कुल्ला कर लें।
=खाना खा लेने के बाद प्लेट को खिसकाएं नहीं बल्कि छुरी कांटा तिरछा कर रख दें ताकि वेटर समझ सके कि आप खाना खा चुके हैं। सूप लेते समय या डेजर्ट लेते समय आधा स्पून भरें और किनारे से उसे मुंह में डालें ताकि वो बाहर न गिरे। सूप पीते समय सुडक़ें नहीं। धीरे से पिएं। सूप और डेजर्ट समाप्त होने पर स्पून प्लेट की साइड में रखें। बातें धीरे-धीरे करें। ताकि बाकी लोग आपके हंसने और बातें करने पर डिस्टर्ब न हों।
=अगर बच्चे साथ हों तो उन्हें भी सिखाएं कि रेस्तरां में कैसे व्यवहार करना चाहिए।
इस प्रकार ईटिंग आउट मजेदार होना चाहिए न कि तनाव भरा।
=नीतू गुप्ता

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