क्यों जरूरी है विवाह महिलाओं के लिए ?

विवाह सभ्य समाज के लिए अ अवश्यक विधान है। भारतीय समाज में विवाहित स्त्री को अ धिक सम्मान दिया जाता है। लड़की की जिंदगी में विवाह सिर्फ एक बार घटने वाली महत्वपूर्ण घटना है। शास्त्रों द्वारा स्वीकृत सिर्फ यही एक धार्मिक अ नुष्ठान है जो स्त्री की पवित्रता
को अ धिक मूल्य देता है।
भारतीय समाज में लड़कियों के विवाह के अ ावश्यक होने की सच्चाई उसे
नीचा दिखाती है। विधवा, तलाकशुदा या अ केली स्त्री को सम्मान नहीं दिया
जाता लेकिन इससे भी अ धिक नीचा दिखाने वाला व्यवहार है दहेज प्रथा।
समाज की परंपरा के क्रम में लड़की देने वालों का स्थान लड़की लेने वालों
के स्थान से नीचा होता है। माता-पिता को लड़की का विवाह एक निश्चित
जाति में कराने के लिए लड़के के परिवार वालों को उनकी मांग के अ नुसार
नकद या सामान के रूप में भारी मूल्य देना पड़ता है। दिया जाने वाला मूल्य
दोनों पक्षों के लिए सम्मान बढ़ाने वाला होता है।
यह दो शरीरों व हृदयों को मिलाने वाले तथाकथित कार्य का एक देशी
व्यापारिक लेन-देन है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रमुख रूप से लड़की बलि का
बकरा है। अ ाधुनिकीकरण ने इस कुप्रथा को खत्म करने के बजाए बढ़ा दिया
है।
ऊँची शिक्षा, सरकारी नौकरियों, अ धिक लाभप्रद नौकरी पेशे वाले लड़के
बहुत ऊँची रकम की मांग करते हैं। अ ाज मध्यमवर्गीय माता-पिता के लिए
एक लड़की के विवाह का खर्च करीब ढाई लाख रूपये है।
दुख देने वाली बात तो यह है कि एक उच्च शिक्षित नौकरी शुदा लड़की का
विवाह करने के लिए भी दहेज देना पड़ता है। पहले यह माना जाता था कि
दहेज सिर्फ ऊँची जातियों की बुराई है लेकिन अाज दहेज का चलन गरीब
लोगों के बीच भी है। दुख तो इस बात का है कि बिक्री लड़कों की होती है,
फिर भी सतायी जाती हैं लड़कियां। उन्हें अ अौर अधिक पैसे लाने के लिए
सताया जाता है अौर उनके साथ अ मानवीय व्यवहार किया जाता है।
अौरतों की निम्न स्थिति का अौर अधिक व क्रूर प्रमाण दहेज मौतों की घटना
हैं। ससुराल वालों तथा पति के लालच की कोई सीमा नहीं है। अ धिक
उपहारों अौर सामानों की मांग कर पति अ पनी युवा पत्नी को तंग करता है।
सम्मान, प्रतिष्ठा, समाज में इज्जत के नाम पर माता-पिता सताई हुई लड़की
को असरा देने के लिए तैयार नहीं होते। अाखिरकार किसी भी स्थान पर
अाराम न पाकर जिन्दगी से हारकर जिन्दगी को समाप्त करने का रास्ता
अपनाती लड़की अात्महत्या को मजबूर होती है। = पूनम कुमारी

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