कैसे रखें दांपत्य खुशहाल

पारंपरिक वैवाहिक बंधन का स्वरूप बहुत ही अ ानंददायक रहा है। बाजेजे, दूल्हा बारात, सजे धजे रिश्तेदारों की गहमागहमी, कहीं खाने की उ$डती सोंधी खुशबू, कहीं फूलों से महकता वातावरण, ऐसे में नई नवेली कमसिन दुल्हन अ ांखों में सपने संजोए ससुराल अ ाती थी जहां बच्चे जवान ब$डे बू$ढे घर के सभी सदस्य उसके स्वागत के लिए तत्पर रहते थे। सब से ब$ढकर एक नये जीवन साथी का अ ंतरंग साथ, बहुत कुछ नया अ नबूझा अ नुभूत करने, एक्सह्रश्वलोर करने को होता था। ध$डकनें बेकाबू हो जाती थी। पिया का स्पर्श मात्र बदन में ह$जार वोल्टेज के करंट मारने लगता था। पति पत्नी तन मन से एक दूजे को स्वीकार लेते थे। एक एवरेज शादी, एक साधारण मध्यवर्गीय युगल जीवन के उतार च$ढाव के साथ-साथ जीते प्रेम अ पनत्व में डूबे यूं अ पनी जिन्दगी का सफर गुजार लेते थे। इन्होंने दांपत्य पर कोई पोथी नहीं प$ढी, कोई रिसर्च काउंसलिंग नहीं की होती थी। पत्नी अ ाज की भाषा में दब्बू होती थी। पति को अ ासानी से अ पने ऊपर हावी हो जाने देती, अ ाज की भाषा में जिसे प्रता$डना कहते हैं, ऐसा कुछ उसकी सोच में न था। पति उसे लेकर प$जेसिव था। वह उसे अ पने से जुदा नहीं समझता था। यहां पर सेपरेट अाइडेंटिटी नहीं, सहअ स्तित्व अ हम बात थी। समय के बदलाव ने बहुत कुछ अ च्छा बुरा देखा। यह क्यों अौर कैसे हुअा पारंपरिक वैवाहिक बंधन का स्वरूप बहुत ही अानंददायक रहा है। बाजे गाजे, दूल्हा बारात, सजे धजे रिश्तेदारों की गहमागहमी, कहीं खाने की उ$डती सोंधी खुशबू, कहीं फूलों से महकता वातावरण, ऐसे में नई नवेली कमसिन दुल्हन अाखों में सपने संजोए ससुराल अ ाती थी जहां बच्चे जवान ब$डे बू$ढे घर के सभी सदस्य उसके स्वागत के लिए तत्पर रहते थे। सब से ब$ढकर एक नये जीवन साथी का अ ंतरंग साथ, बहुत कुछ नया
अ नबूझा अ नुभूत करने, एक्सह्रश्वलोर करने को होता था। ध$डकनें बेकाबू हो
जाती थी। पिया का स्पर्श मात्र बदन में ह$जार वोल्टेज के करंट मारने लगता
था। पति पत्नी तन मन से एक दूजे को स्वीकार लेते थे। एक एवरेज शादी,
एक साधारण मध्यवर्गीय युगल जीवन के उतार च$ढाव के साथ-साथ जीते
प्रेम अ पनत्व में डूबे यूं अ पनी जिन्दगी का सफर गुजार लेते थे। इन्होंने दांपत्य
पर कोई पोथी नहीं प$ढी, कोई रिसर्च काउंसलिंग नहीं की होती थी।
पत्नी अ ाज की भाषा में दब्बू होती थी। पति को अ ासानी से अ पने ऊपर हावी
हो जाने देती, अ ाज की भाषा में जिसे प्रता$डना कहते हैं, ऐसा कुछ उसकी
सोच में न था। पति उसे लेकर प$जेसिव था। वह उसे अ पने से जुदा नहीं
समझता था। यहां पर सेपरेट अ ाइडेंटिटी नहीं, सहअ स्तित्व अ हम बात थी।
समय के बदलाव ने बहुत कुछ अ च्छा बुरा देखा। यह क्यों अ ौर कैसे हुअ ा,

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