शादी से पहले काउंसलिंग के फायदे

आजकल रिश्तों में स्थिरता और एकदूसरे के लिए धैर्य खत्म होता जा रहा है जिसके चलते विवाह के बाद पति-पत्नी एकदूसरे को समझने के बजाय छोटी-छोटी बातों पर झगडऩे लगते हैं। नतीजतन बात अलगाव तक पहुंच जाती है। ऐसे में जरूरी है कि रिश्तों में अंतरंगता और उन्हें अटूट बनाए रखने के लिए शादी से पहले काउंसलिंग ली जाए। इससे दंपतियों को चीजों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
मैरिज काउंसलर आजकल व्यावसायिक विशेषज्ञ भी होते हैं जिनसे नवविवाहित जोड़े और शादी करने वाली जोडिय़ां मिल कर अपनी समस्याओं और शंकाओं के समाधान पा सकती हैं। कई बार पति-पत्नी का रिश्ता बेतुकी बातों के कारण टूटने के कगार पर पहुंच जाता है क्योंकि उन्हें विवाह के बाद रिश्तों को कैसे निभाया जाए, इस बात का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता।
हम भारतीय शादी पर लाखों-करोड़ों रूपए तो खर्च कर देते हैं, लेकिन शादी को निभाने के लिए जरूरी काउंसलिंग पर पैसा नहीं खर्च करते। इसकी जरूरत ही नहीं समझते। तभी आजकल तलाक के कई ऐसे मामले भी देखने में आते हैं जहां तलाक का कारण मात्र यह होता है कि हनीमून के अगले दिन पति ने गीला टावेल बिस्तर पर रख दिया तो पत्नी को नागवार गुजरा।
मैरिज काउंसलिंग 2 बातों से जुड़ी होती है। पहली स्वास्थ्य से संबंधित तो दूसरी रिश्तों से संबंधित। काउंसलिंग के दौरान शादीशुदा जीवन में आने वाली सामान्य कठिनाइयों, उनसे बचने के उपायों और शादी को सफल बनाने की जानकारी दी जाती है। जहां विवाह के बाद स्वास्थ्य संबंधी काउंसलिंग वैवाहिक जीवन में काम आती है, वहीं रिश्तों से संबंधित जानकारी होने से नवविवाहित नए माहौल में खुद को आसानी से एडजस्ट कर लेते हैं।
शादी को ले कर लड़का-लड़की दोनों के मन में शारीरिक के अलावा रिश्ता निभाने संबंधी भी अनेक सवाल होते हैं पर उनके सही जवाब न दोस्तों के पास होते हैं और न ही परिवार वालों के पास। ऐसे में मैरिज काउंसलर ही एक ऐसा शख्स होता है जो उनकी शंकाओं का समाधान कर सकता है। मैरिज काउंसलिंग का फायदा यह भी होता है कि दोनों पार्टनर जो एकदूसरे से इन विषयों पर बात करने से झिझकते हैं, वे एकदूसरे से खुल जाते हैं और दोनों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होता है।
शादी एक ऐसा टर्निंग पाइंट होता है जब आपका लाइफ स्टाइल बिलकुल बदल जाता है, शादी के पहले की काउंसलिंग से वैवाहिक बंधन में बंधने वाले जोड़ों को आने वाले जीवन के लाइफ स्टाइल को समझने और उसके हिसाब से खुद को ढालने में मदद मिलती है। शादी के बाद प्रैक्टिकल तौर पर जब आप प्रेमी-प्रेमिका से पति-पत्नी बनते हैं तो घरेलू जिम्मेदारियों को ले कर एकदूसरे पर गलतियां थोपने से रिश्तों में दरार आ जाती है। ऐसे में दोनों में से कोई भी एक दूसरे की जिम्मेदारी उठाने से कतराने लगता है। ऐसे में जिम्मेदारियों को समझने और उन्हें सही तरह से निभाने के लिए मैरिज काउंसलिंग बहुत जरूरी होती है। शादी के परामर्श की मदद से दोनों साथी एकदूसरे की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
मैरिज काउंसलर्स जोड़ों की मदद करते हैं ताकि वे वर्तमान के साथ ही भविष्य के बारे में भी प्लानिंग कर सकें जैसे फैमिली प्लानिंग, ससुराल के रिश्ते के साथ मैनेजमैंट, फाइनेंशियल प्लानिंग, क्योंकि एक सफल शादीशुदा रिश्ते के लिए प्यार ही नहीं, प्रैक्टिकल सोच की भी जरूरत होती है।
मैरिज काउंसलर कपल्स से सिर्फ पॉजिटिव बातें ही नहीं करता बल्कि वह ऐसे मुद्दों को भी उठाता है जिनके बारे में लोग बात नहीं करना चाहते या करने से झिझकते हैं जबकि शादी करने से पहले यह जानना जरूरी है कि क्या सचमुच आप एकदूसरे के लिए बने हैं? क्या आप इमोशनली, सैक्सुअली, फाइनेंशियली साथ निभा सकते हैं? क्या अपने रिश्ते को ले कर दोनों की सोच एक जैसी है? इन सवालों के जवाब से आप जान पाएंगे कि क्या सच में आप शादी के लिए तैयार हैं या नहीं।
हाल ही में देहरादून के राज्य महिला आयोग द्वारा महिलाओं को उनके हक दिलाने और रिश्तों को मजबूत करने की सीख देने के लिए एक नई शुरूआत की गई है। आयोग ने प्रीमेरिटल काउंसलिंग की शुरूआत की है। आयोग का मानना है कि शादी करने से पहले सभी जोड़े एक बार यह काउंसलिंग अवश्य कराएं। इससे उनके रिश्ते मजबूत होंगे। भविष्य में उन्हें आपसी रिश्ते निभाने में आसानी होगी। (उर्वशी)

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