प्यार करने से पहले जरा सोचें

प्यार एक ऐसी अनुभूति है जो समान उम्र वालों में अधिक होती है। किशोरावस्था के नाजुक दौर में प्यार होना स्वाभाविक समझा जा सकता है लेकिन यदि कोई चालीस वर्ष का अधेड़ व्यक्ति बीस वर्ष की लड़की को भगा ले जाए या उससे प्यार की बात करे तो वह नाटक ही लगता है।
ऐसी स्थिति में लड़की की उम्र ऐसी होती है जिसमें सभी प्यारे लगने लगते हैं। इस उम्र में लड़की को इस बात का आभास नहीं होता कि वह जिसके प्रति आकर्षित हो रही है, वह उसके अनुकूल है भी या नहीं। इस दौर में कोई उसे सही सलाह देना चाहता है तो उसे बहुत बुरा लगता है।
दूसरी  ओर वह युवक जो लड़की को प्रेमजाल में फांस चुका होता है, प्यार का सिर्फ नाटक ही करता है क्योंकि वह उस बात को जानता है कि सामने वाली लड़की उम्र में मुझसे बहुत छोटी है। हालांकि यह बात सही है कि प्यार उम्र, जाति, समाज के बंधन को नहीं मानता, लेकिन इस तरह का मेल प्यार न होकर प्यार का नाटक ही लगता है। वैसे भी पुरूष की यह प्रवृत्ति ही रहती है कि उसकी उम्र कितनी भी हो लेकिन उसका मेल किसी युवा लड़की से ही होना चाहिए।
ऐसी बातें अक्सर उन घरों में होती हैं, जिन घरों में माता-पिता अपनी जवान लड़कियों पर पाबन्दियों के पहरे लगा कर रखते हैं। उन्हें कहीं बाहर निकलने नहीें देते। किसी से कभी बात नहीं करने देते और घर में अघोषित कैद कर रखते हैं। घरवालों की इन ज्यादतियों से तंग आ कर लड़की उस व्यक्ति से प्यार करने लगती है जो अक्सर उसके घर आता जाता हो, अब चाहे वह उसके पिता का दोस्त हो अथवा बड़े भाई का मित्रा।
इस तरह के अशोभनीय मेल को रोकने के लिए सबसे पहला कदम यही होना चाहिए कि किशोरावस्था के नाजुक दौर में कभी भी लड़की या लड़के पर पाबंदियों का पहरा नहीं बिठाना चाहिए। इस उम्र में बच्चों पर ध्यान अवश्य देना चाहिए लेकिन उन्हें उनकी इच्छानुसार जीने देना चाहिए। यदि वे कोई गलती करते हैं तो उन्हें एक मित्र की तरह अच्छे बुरे का फर्क समझाना चाहिए।
यदि जवानी में बच्चों पर दबाव डाला गया तो वे विद्रोह भी कर सकते हैं। अधिक उम्र अंतर के प्रेम और घर से भागने वाले किस्से भी इन्हीं कारणों से होते हैं हैं, अत: इस तरह के प्रेम के नाटक का अन्त होना चाहिए।
लड़कियों को भी ऐसे अधेड़ उम्र के व्यक्ति से प्यार करने से पहले यह सोचना चाहिए कि वे जिससे प्यार कर रही हैं वह उसके लायक है भी या नहीं। इस तरह के प्यार के परिणाम अभी तो मालूम नहीं पड़ते लेकिन कुछ वर्ष गुजरने पर यही उम्र का अंतर खलने लगता है। जब कभी अपने पति के साथ घर से निकलने का काम पड़ता है, आपको बूढ़े पति के साथ निकलने में शर्म का आभास होने लगता है।
इसलिए प्यार करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन ऐसे अनसोचे, अनमेल  और अशोभनीय प्यार करने में जरूर बुराई है। इस तरह के प्यार करने से पहले एक बार सोच अवश्य लें कि आपका प्यार उचित है या नहीं। (उर्वशी)

https://play.google.com/store/apps/details?id=org.apnidilli.app

http://www.apnidilli.com/

http://adnewsportal.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *