स्‍तनों की गांठ व बवासीर को जड़ से खत्‍म करती है ये 1 फूल

# कचनार कई रोगों को जड़ से खत्‍म करने की क्षमता रखता है।
# इस पेड़ की पत्तियां, तना व फूल आदि सभी उपयोगी हैं।
# कचनार की गणना सुंदर व उपयोगी वृक्षों में होती है।


प्रकृति के पास औषधि का खजाना है जो युगों-युगों से जीवों के काम आते रहे हैं। इन्हीं में से एक कचनार का पेड़ भी है जो कई रोगों को जड़ से खत्‍म करने की क्षमता रखता है। इस पेड़ की पत्तियां, तना व फूल आदि सभी उपयोगी हैं। कचनार की गणना सुंदर व उपयोगी वृक्षों में होती है। इसकी अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से गुलाबी कचनार का सबसे ज्यादा महत्‍व है। कचनार के फूल, कलियां और वृक्ष की छाल को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह शरीर के किसी भी भाग में ग्रंथि (गांठ) को गलाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा रक्त विकार व त्वचा रोग जैसे- दाद, खाज-खुजली, एक्जीमा, फोड़े-फुंसी आदि के लिए भी कचनार की छाल का उपयोग किया जाता है। यह वात रोगों के लिए भी बहुत लाभकारी है।
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आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे किसी प्रकार की कोई बीमारी या समस्या न हो. कोई बहुत ज्यादा बड़ी होती है तो कोई बहुत मामूली. लेकिन इन सभी में सबसे अधिक समस्याएं महिलाओ के साथ देखने को मिलती है. थाइराइड, डिप्रेशन और मोटापा कुछ ऐसी ही बीमारियां है. लेकिन इसके अलावा एक और समस्या है जो आज कल की महिलाओ में देखने को मिलती है. जी हां, हम बात कर रहे है स्तन में गांठ की.
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हर 100 में से 90 पीड़ित महिला गांठ को कैंसर समझ लेती है. जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है. क्योंकि स्तन में गांठ होना कोई बड़ी बात नहीं है ये किसी को भी हो सकती है लेकिन यदि इसका समय पर उपचार और सही देखभाल न की जाये तो ये कैंसर का रूप ले सकती है.
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स्तन में मौजूद हर गांठ कैंसर नहीं होती क्योंकि कर बार स्तन में वसा के जमने और शरीर में आयोडीन की कमी की वजह से भी ये समस्या उत्पन्न होने लगती है. लेकिन यदि गांठ के साथ-साथ स्तन में अधिक दर्द और खिंचाव महसूस होने लगे तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए. क्योंकि हो सकता है जिसे आप सामान्य गांठ समझ रही हो वे आपके लिए हानिकारक हो.
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बहुत सी महिलाओ का यही मानना होता है की स्तन में गांठ का कारण कैंसर है. जबकि ऐसा नहीं है कैंसर के अतिरिक्त और भी कई कारणों की वजह से स्तन में गांठ उत्पन्न हो जाती है. जैसे कई बार स्तन में मौजूद मासपेशियां जुड़ने लगती है जिसकी वजह से स्तन में गांठ पड़ने लगती है. लेकिन इस स्थिति में घबराने की बात नहीं है क्योंकि थोड़े से देखभाल और जागरूकता के साथ इस गांठ को खोला जा सकता है. इसके अलावा अपने खानपान पर पूरा ध्यान देना भी आपकी इस समस्या को हल करने में आपकी मदद कर सकता है.

बवासीर
कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप छांछ के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से बवासीर में खून गिरना बंद होता है। कचनार की कलियों के पाउडर को मक्खन और शक्कर मिलकर 11 दिन खाएं। आंतों में कीड़े हों तो कचनार की छाल का काढ़ा पिएं।
सूजन
कचनार की जड़ को पानी में घिसकर लेप बना लें और इसे गर्म कर लें। इसके गर्म-गर्म लेप को सूजन पर लगाने से आराम मिलता है।
स्तनों की गांठ
कचनार की छाल को पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण लगभग आधे ग्राम की मात्रा में सौंठ और चावल के पानी (धोवन) के साथ मिलाकर पीने और स्तनों पर लेप करने से गांठ ठीक होती है।
मुंह में छाले
कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ा-सा कत्था मिलाकर छालों पर लगाने से आराम मिलता है।

खांसी और दमा
शहद के साथ कचनार की छाल का काढ़ा 2 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करने से खांसी और दमा में आराम मिलता है।
दांतों के रोग
कचनार की छाल को पानी में उबाल लें और उस उबले पानी को छानकर एक शीशी में बंद करके रख लें। यह पानी 50-50 मिलीलीटर की मात्रा में गर्म करके रोजाना 3 बार कुल्ला करें। इससे दांतों का हिलना, दर्द, खून निकलना, मसूढों की सूजन और पायरिया खत्म हो जाता है।
कब्ज
कचनार के फूलों को चीनी के साथ घोटकर शर्बत की तरह बनाकर सुबह-शाम पीने से कब्ज दूर होती है और मल साफ होता है। कचनार के फूलों का गुलकन्द रात में सोने से पहले 2 चम्मच की मात्रा में कुछ दिनों तक सेवन करने से कब्ज दूर होती है।
कुबड़ापन
अगर कुबड़ापन का रोग बच्चों में हो तो उसके पीठ के नीचे कचनार का फूल बिछाकर सुलाने से कुबड़ापन दूर होता है। लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग कचनार और गुग्गुल को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से कुबड़ापन दूर होता है। कुबड़ापन के दूर करने के लिए कचनार का काढ़ा बनाकर सेवन करना चाहिए।
घाव
कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से घाव ठीक होता है। इसके काढ़े से घाव को धोना भी चाहिए।

स्रोत:www.onlymyhealth.com
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