खतरनाक बीमारी हो सकती है, अगर अचानक बढ़ जाती है दिल की धड़कन तो

** इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया दिल से संबधित रोग है।
** इसमें अचानक ही तेज चलने लगती है दिल की धड़कन।
** टेककार्डिया के रोगी को ज्यादा नहीं करें शारीरिक श्रम।

दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब तक ये दिल धड़क रहा है हमारे शरीर में जान है और जब इसका धड़कना बंद हो जाए तो इंसान का सारा शरीर काम करना बंद कर देता है और उसकी मौत हो जाती है। इसलिए दिल का लगातार धड़कते रहना हमारी जिंदगी के लिए बहुत जरूरी है। कई बार कुछ शारीरिक परेशानियों की वजह से दिल की धड़कन घटती-बढ़ती रहती है। दिल की धड़कन के घटने या बढ़ने से कई तरह की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ये स्थिति दिल के साथ-साथ शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों जैसे फेफड़ा, लिवर, किडनी और दिमाग को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया
इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया (आइएसटी) भी हार्ट से संबंधित एक ऐसी ही समस्‍या है। टेककार्डिया, शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकता है। अक्‍सर चिंता, बुखार, खून का ज्यादा बहाव व थकावट वाली एक्सरसाइज के बाद हृदय की गति बढ़ जाती है। साथ ही कई चिकित्सीय कारणों के चलते भी टेककार्डिया की समस्या हो जाती है जैसे थायराइड, हाइपरथाइराइडिज्म आदि। कई बार व्यक्ति में निमोनिया होने के कारण वह सांस लेने में असमर्थ हो जाता है जिससे टेककार्डिया की शिकायत हो सकती है।
रोग के लक्षण
टेककार्डिया साइनस और नॉन साइनस दो प्रकार का होता है। साइनस टेककार्डिया एप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया और इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया (आइएसटी) दो तरह का होता हैं। इनएप्रोप्रिएट साइनस टेककार्डिया को पहली बार 1979 में परिभाषित किया गया था। आइएसटी अक्‍सर युवा महिलाओं में पायी जाने वाली समस्‍या है। यह समस्‍या क्‍यों होती है इसके बारे में अभी स्‍पष्‍ट जानकारी नहीं है। सामान्‍यतया आइएसटी की समस्‍या की पहचान 20 साल और 30 साल के युवाओं में की जाती है। धकधकी (दिल का तेजी के साथ धड़कना) की समस्‍या, रोगी के सीने में दर्द और गर्दन में स्‍पन्‍दन, थकावट और पसीने आने के लक्षण, मरीज को हृदय गति तेज महसूस होना, हाइपरथाइराइडिज्म, वजन में कमी होना, बुखार का बने रहना, चिंता बनी रहना आदि इसके सबसे मुख्य लक्षण होते है।
रोग के कारण
इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया क्‍यों होता है, अभी शोधकर्ता इस निष्‍कर्ष पर नहीं पहुंच सके हैं। इसमें हार्ट रेट बिना किसी खास वजह के सामान्‍य से तेज हो जाती हैं और हार्ट रेट 100 बीट प्रति मिनट और इससे ऊपर तक पहुंच जाती है। यदि किसी में इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया के लक्षणों में से कोई लक्षण पाया जाता है तो 24 घंटे तक मॉनीटरिंग करके आइएसटी की पहचान की जा सकती है। आइएसटी के मरीजों की सामान्‍यतया प्रति दिन की हार्ट रेट 100 बीट प्रति मिनट से भी अधिक होती है। जब इस तरह के मरीज बिस्‍तर पर लेट जाते हैं तो इन्‍हें अपनी हार्ट रेट नार्मल लगती है। आइएसटी के मरीज को कई बार सोने के दौरान अपनी कम हार्ट बीट महसूस होती है। जबकि देखा जाता है कि उसकी हार्टबीट 130 तक होती है।
रोग का उपचार
आइएसटी का रोगी को शारीरिक श्रम से परहेज करना चाहिए। इनएप्रोप्रीएट साइनस टेककार्डिया लंबे समय तक बनी रहने वाली समस्‍या है। इसलिए इसका उपचार भी लंबे समय तक चलता है। आइएसटी का उपचार दवाईयों के द्वारा या ओपन हार्ट सर्जरी के द्वारा किया जाता है। हालांकि ऐसा कम देखा गया है कि ओपन हार्ट सर्जरी की कम ही जरूरत पड़ती है। इसके मरीजों का उपचार चिकित्‍सक अधिकतर दवाईयों द्वारा ही करते हैं।
यदि आपको इनमें से इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया का कोई भी लक्षण अपने शरीर में लगता है तो 24 घंटे तक अपने शरीर की मॉनीटरिंग करें। इसके बाद तुरंत चिकित्‍सक से परामर्श करें।

स्रोत:www.onlymyhealth.com
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