तीस के बाद त्वचा की देखभाल

जैसे-जैसे मनुष्य की आयु बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे उसकी त्वचा अपना लचीलापन खोती जाती है। नतीजा यह होता है कि त्वचा में झुर्रियां पडऩी शुरू हो जाती हैं। प्रत्येक व्यक्ति की त्वचा की बनावट भिन्न-भिन्न होती है। तीस वर्ष की आयु तक मृत कोशिकाओं के स्थान पर नयी कोशिकाएं बनती रहती हैं। बाद में यह प्रक्रिया समाप्त प्राय: हो जाती है।
मनुष्य की त्वचा पर जलवायु का खासा प्रभाव पड़ता है। ठण्डे प्रदेशों के लोगों की त्वचा में कम आयु में झुर्रियां पड़ती हैं, वहीं लातिनी अमेरिका, दुनियां के पूर्वी हिस्से और भूमध्यसागरीय देशों के लोगों की त्वचा में झुर्रियां देर से पड़ती हैं, इसी प्रकार उन काले लोगों, जिन की त्वचा सामान्य शुष्क होती है, को बुढ़ापे में झुर्रियों का सामना करना पड़ता है।
यह तो सच है कि रंग-रूप और शारीरिक बनावट प्रकृति की देन है पर यदि हमें स्वस्थ व सुंदर रहना है तो इसकी देखभाल करनी ही होगी। जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि तीस की आयु के बाद त्वचा में नवीन कोशिकाओं का निर्माण न्यूनतम हो जाता है, फलस्वरूप धीरे-धीरे त्वचा की कांति घटने लगती है। यह समय चेहरे की विशेष देखभाल का प्रारंभ होता है।
द्व चेहरे की नियमित मालिश की जानी चाहिए। ध्यान दें कि मालिश में हाथ का स्पर्श नीचे से ऊपर की ओर होना चाहिए। मालिश से रक्त संचार ठीक से बना रहता है।
** मालिश के बाद त्वचा को किसी औषधियुक्त साबुन से धोया जाना चाहिए।
** बढ़ती उम्र में चेहरे को धूल व धुएं से बचाना चाहिए।
** त्वचा की उचित सफाई आवश्यक है। इसके लिए कच्चा दूध सबसे उपयुक्त है, कच्चे दूध में नयी रूई का फाहा भिगो-भिगोकर चेहरे की सफाई करनी चाहिए।
** यदि आपकी त्वचा अधिक तैलीय हो तो औषधियुक्त साबुन से दिन में दो-तीन बार अवश्य धोएं व मुलायम तौलिए से त्वचा दबा-दबा कर सुखाएं।
** त्वचा के लिए पानी भी एक अच्छा टॉनिक है। प्रतिदिन छपाके मार-मार कर ताजे जल से त्वचा को धोना चाहिए और रोजाना 1०-12 गिलास पानी पीना चाहिए।
** सप्ताह में दो बार बेसन, हल्दी, नींबू रस और शहद मिलाकर चेहरे पर उबटन करना चाहिए।
** तनाव झुर्रियों को आमंत्रित करता है, अत: अधिक अभिलाषाएं, चिंताएं छोड़कर संतोष व शांति का वरण करें।
** चेहरे के पोषण के लिए किसी अच्छी कोल्ड क्रीम में विटामिन ए और ई के दो-दो कैप्सूल का पाउडर मिला लें। इसे दिन में दो बार चेहरे पर लगाएं।
** भोजन में दूध, दही, मक्खन, मौसमी फल व हरी साग सब्जियां अधिकाधिक लें।
** मांस-मदिरा, चाय, कॉफी, धूम्रपान से बचें।
** चौबीस घंटे में न्यूनतम आठ घंटे अवश्य सोएं।
** शारीरिक श्रम की आदत बनाएं। शारीरिक श्रम से शरीर में रक्त संचार बढ़ता है जिससे स्वस्थ व सुंदर बने रहने में भारी मदद मिलती है। दूसरे शारीरिक श्रम से पसीना आता है और पसीने के द्वारा शरीर की अशुद्धियां बाहर निकलती हैं। इससे त्वचा ठीक रहती है। …………………(उर्वशी)

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