सावधानी बरतें सब्जी खरीदते समय

पाकशास्त्र एक कला है पर इसके साथ ही सब्जी खरीदना भी एक कला है। सब्जियों का चुनाव कठिन नहीं है। प्रति दिन खरीदते समय धीरे-धीरे इनकी पहचान में निपुणता आ जाती है।
सब्जियां खरीदते समय मौसम का ध्यान अवश्य रखें। गर्मियों में सब्जी जल्दी खराब हो जाती है। कोशिश करें गर्मियों में सब्जी फालतू न खरीदें। आवश्यकतानुसार खरीदने में समझदारी है।
बरसातों में रेफ्रिजिरेटर में भी अधिक दिन आप सब्जी को ताजा नहीं रख सकते। ऐसे में कम मात्र में सब्जी खरीदें। प्याज, आलू भी इकट्टे खरीद कर न रखें। बरसात में ये भी जल्दी गल कर खराब हो जाते हैं।
शीत ऋतु में आप सब्जियों को फ्रिज में एक सप्ताह तक ताजा रख सकती हैं। पत्तेदार सब्जियां, साग आदि खरीद कर उन्हें उबाल कर फ्रिज में रख सकती हैं। आवश्यकता पडऩे पर उतना साग निकालें और ताजा छौंक लगाकर प्रयोग में लाएं। खरीदते समय मौसमी सब्जी को प्राथमिकता दें। सब्जी प्राय: सुबह ताजगी से भरपूर होती है, तभी खरीदें। गली सड़ी सब्जियों को न खरीदें। पत्तेदार सब्जियों में पत्ते
हरे हों, इस बात का ध्यान रखें।
बैंगन:- खरीदते समय ध्यान रखें कि वे गोल, बड़े व हल्के वजन के ही हों। छोटे-लम्बे बैंगन खरीदते समय ध्यान दें कि छेद वाले बैंगन न खरीदें। उनमें कीड़े होने की संभावना हो सकती है। अधिक चमक लिए बैंगन न खरीदें। बासी बैंगन पर तेल चुपड़ कर दुकानदार ताजा कहकर बेचते हैं या फिर ऐसे बैंगन रासायनिक तत्व लगे हो सकते हैं।
फूल गोभी:- हमेशा हल्के पीले रंग वाली गठी हुई, कम डंठल वाली गोभी खरीदें। पीली, छितरी हुई, मुरझाई गोभी न खरीदें। गोभी का फूल अधिक बड़ा नहीं होना चाहिए। मध्यम आकार के फूल उचित रहते हैं। फूल को अच्छी तरह से घुमा फिराकर देख लें। कहीं कीड़े दिखाई दे जायें तो उसे कदापि न खरीदें।
पत्ता गोभी:- सदा ठोस, हरे रंग वाली, पत्ते मुरझाएं हुए न हों, ऐसी पत्तागोभी खरीदें। इसे काटते समय ध्यानपूर्वक काटें क्योंकि इसमें छोटे हरे कीड़े होने की संभावना होती है। कोशिश करें कि भाप की हुई पत्ता गोभी या पूरी पका कर ही खायें। कच्ची बंदगोभी का प्रयोग न करें।
टमाटर:- हमेशा सख्त, लाल खरीदें। हरे टमाटर गले में खराश पैदा करते हैं। मोटे छिल्कों वाले टमाटर काटने में कठिनाई पैदा करते हैं। ढीले टमाटर न खरीदें।
मूली-गाजर:- गाजर मूली हरे पत्ते वाली नर्म देखकर खरीदें। मूली की पूंछ वाली तरफ से थोड़ा सा तोड़ कर देख लें। यदि जाली लिए हुए मूली हो तो ऐसी मूली न खरीदें। गाजर मध्यम, पतली, लाल, चिकनी खरीदें। लाल गाजर स्वाद में मीठी होती है। फीके रंग की सख्त गाजर स्वादहीन होती है। टेढ़ी मेढ़ी गाजर न खरीदें।
साग:- साग वगैरह खरीदते समय ध्यान दें कि पत्ते हरे और ताजे होने चाहिएं। छेद वाले पत्तों का साग न खरीदें। वे पत्ते कीड़ा खाए हो सकते हैं। साग खरीदते समय मोटी डंडियों वाला साग न लें। ऐसे साग सख्त होते हैं जो गलने में पूरी तरह मिक्स नहीं हो पाते हैं।
आलू:- आलू कभी भी बहुत मोटे न खरीदें। मध्यम आकार वाला खरीदें। आलू जो हरा छिलका लिए हों या अंकुर निकले हुए हों, न खरीदें। चपटा आलू उचित माना जाता है।
प्याज खरीदते समय ध्यान दें कि प्याज सूखा, लाल, पतले छिल्के व एक गांठ वाला होना चाहिए। गीला प्याज न खरीदें। वह जल्दी गल जाता है।
अधिक गांठ वाली टेढ़ी मेढ़ी अदरक न खरीदें। पतले छिलके वाला, बिना दाग का चिकना नींबू उत्तम होता है।
इस प्रकार घीया, टिंडा हल्के हल्के रोंए वाला, हरे रंग का देखने में नरम हो, तभी खरीदें। टेढ़ी मेढ़ी पीली लौकी टिंडा न खरीदें।
फ्रिज में सब्जियां धोकर, पोंछकर लिफाफों में डालकर रखें। आलू, प्याज, अलग-अलग खुली टोकरियों में रखें। आवश्यकतानुसार सब्जी खरीदें। साग वगैरह एक बार में उबालकर फ्रिज में रख सकते हैं। जल्दी खराब होने वाली सब्जियों का प्रयोग जल्दी कर लें।
सब्जी खरीदने जाते समय घर से कपड़े या जूट का थैला लेकर जायें। कटी हुई सब्जियां जैसे पेठा, कटहल जब भी खरीदें, उनको अच्छी तरह से धोकर उसी दिन प्रयोग में लायें। अधिक दिन तक रखने से संक्रमण के कीटाणु उत्पन्न हो सकते हैं। मशरूम आदि भी शीघ्र प्रयोग कर लें। मटर, हरा छोलिया छीलकर थैलियों में डालकर रख सकते हैं। (उर्वशी)

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