फ्रेंड्स हैं स्ट्रीटलाइट की तरह

जीवन में फ्रेंड्स के साथ गुजारे पल यादगार बन जाते हैं। जीवन में हर मोड़ पर इस साथ की अहमियत हैं। चाहे घूमना फिरना, पिकनिक मौजमस्ती, फेस्टिवल हो या अंतरंग बातें शेयर करने की बेचैनी हो, कई बातें हम सिर्फ अपनी फ्रेंड्स के साथ ही बांटना पसंद करते हैं।
फ्रेंड्स कभी भी आपके लिए घर की बनी कोई अच्छी सी डिश लेकर आती हैं। उन्हें आपके घर आने पर डस्टिंग या बाथरूम साफ करने से भी गुरेज नहीं होता। वे आपके बच्चों की बेबी सिटिंग कर लेंगी। आपके सीक्रेट्स भी सीने में दफन कर लेंगी।
आपके मांगने पर वे आपको सिंसियर सलाह देंगी। ये आप पर है आप उसे मानें न मानें।
झूठी प्रशंसा वे नहीं करतीं। न गलत बात को बढ़ावा देती हैं। आपकी पसंद उनकी पसंद से ना भी मिले, इसे लेकर आपसे उनका प्यार कम नहीं होगा।
मुसीबत में आपका साथ देते हुए कठिनाइयों से जूझने में मदद करती है।
टूटे रिश्तों की मार सहने में मददगार होती हैं। नौकरी छूटने पर आपको डिप्रेशन में आने से बचाती हैं। जब बच्चे आपका दिल तोड़ दें तो आपकी व्यथा सहानुभूतिपूर्वक सुनती है।
आपके प्रियजनों में किसी एक की मौत पर वो भी आपके साथ आंसू बहाती हैं।
आपको प्रेमी द्वारा डिच किये जाने पर आपको सपोर्ट करती है, आपके टूटे दिल को जोडऩे में सहायता करती हैं, आपकी खुशी को आपके साथ सेलीब्रेट करती हैं। आपको दुख देने वाले या आपके दुश्मन की वे दुश्मन बन जाती है।
समय का दरिया बहता जाता है। दूरियां विछोह ले आती हैं। बच्चे बड़े होकर घोंसला खाली कर जाते हैं। दिल टूटते हैं, नौकरी बदलती है। करियर का खात्मा हो सकता है। मां बाप गुजर जाते हैं। सहकर्मी अहसान भुला देते हैं। लोग वादे करके भूल जाते हैं, ये कहते हुए कि प्रॉमिसेज आर मेड टू बी ब्रोकन, सुनामी आये या विध्वंसकारी जलजले, समय और वक्त की दूरियां भी दोस्ती पर आंच नहीं आने देती।
जिंदगी जीने लायक और मजेदार दोस्ती के बल पर है, इसमें शक नहीं।
सच्ची फ्रेंड्स आप जैसी भी हैं, आपको उसी रूप में स्वीकारती और पसंद करती हैं। वे आपके स्वभाव और आचरण का दिमागी लेब में डायसेक्शन नहीं करती। उसे एनेलाइज नहीं करती क्योंकि वे जानती हैं परखने से कोई अपना नहीं होता।
वे आपका मोरल बूस्ट करती हैं। आपको नीचा दिखाकर आपका मनोबल गिराने की कोशिश नहीं करती।
वे आपकी राह का रोड़ा तब तक नहीं बनती जब तक कि आपके खाई में लुढ़कने का डर न हो।
 फ्रेंड ही वो हस्ती हैं जिनके सामने आप जैसी हैं वैसी ही रह सकती हैं बगैर मुखौटा ओढ़े।
कई बार वो आपको अपने स्वयं से भी ज्यादा अच्छी तरह समझती है।
ऐसे में क्या आश्चर्य कि उनकी तुलना स्ट्रीटलाइट से की जाए जो राह को छोटा नहीं बनाती लेकिन उसमें रोशनी भर देती है जिससे आपका सफर तय करना सहज मजेदार हो जाता है।……………….. (उर्वशी)

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