बोझ न समझें बेटी की शादी को

बेटी की शादी बेटे की शादी से कहीं अधिक बड़ी जिम्मेदारी है। यूं समझ लीजिए कि माता-पिता के लिए बेटी की शादी कर देना सिर से बोझ उतर जाना है। लड़की जैसे ही युवा हुई कि उसके विषय में चर्चाएं शुरू हो जाती हैं ‘बेटी जवान हो गई है। बस अब इसकी शादी हो जाए। जवानी में कदम रखते ही लड़कियों को यह फुसफुसाहट सुनते-सुनते इसकी आदत हो जाती है।
यदि कोई माता-पिता इस विषय में न सोच रहा हो तो पड़ोसी या रिश्तेदार उन्हें याद दिला देते हैं कि उनकी बेटी शादी के लायक हो गई है। जल्दी ही इस बोझ से मुक्त हों, मतलब बोझ से किसी तरह मुक्ति मिले आगे चाहे जो भी हो। उसकी गृहस्थी बसे या न बसे, शादी कर पाने मात्र से जिम्मेदारी खत्म।
समाज में फैली अनेकों बुराइयां इसी लापरवाही का नतीजा हैं। आनन-फानन में बेटी की शादी बिना सोचे-समझे कर देना नई मुसीबतों को जन्म देना है। बेटी की भलाई-बुराई अच्छी प्रकार सोचकर ही आगे बढऩा चाहिए। बेटी का ब्याह करते समय दूरदर्शिता एवं गंभीरता से काम लिया जाना चाहिए।
सबसे पहले तो अपनी लड़की की उम्र पर गौर करना चाहिए। क्या वह विवाह के योग्य है? या वह यूं ही जवान दिखने लगी है और अभी कम उम्र की बच्ची है। यदि वह विवाहयोग्य है तो उसकी शादी के विषय में पहले राय ले लें। क्या वह शादी करने के लिए तैयार है या वह अभी इस विषय में गंभीर नहीं है, शादी के प्रति उसकी क्या अपेक्षाएं हैं? वह किस प्रकार का पति चाहती है? वह किस प्रकार का माहौल चाहती है? जहां आपने रिश्ते की बात की है, कहीं वे ज्यादा आधुनिक ख्यालों के तो नहीं और आपकी बेटी सादा जीवन तो नहीं पसंद करती।
हो सकता है आपकी बेटी अल्ट्रामाडर्न हो और वह सीधे सादे लोगों के साथ समन्वय न कर पाये। लड़की के लिए ससुराल एकदम नया जीवन प्रारंभ करने के समान है इसलिए यह बात पहले ही तय कर लें कि क्या आपकी बेटी उस परिवार के साथ एडजस्ट कर पाएगी या नहीं। वहां का माहौल कैसा है और आपकी बेटी में हर तरह के माहौल में एडजस्ट करने की क्षमता है या नहीं।
आपकी बेटी जीवन में आगे आने वाली कठिनाइयों का सामना किस प्रकार कर पाएंगी। क्या समस्याएं उसके सामने खड़ी हो सकती हैं। इस पूरे विषय पर अपनी बेटी से खुलकर बात करें। आखिर यह उसके भविष्य का सवाल है।
दूसरे जहां आप उसका रिश्ता करने जा रहे हैं, उनसे भी अपने परिवार के तालमेल के बारे में पूछें। क्या आपकी बेटी पर पाबंदियां होगी? क्या उसे कुछ करने की आजादी होगी एवं अपनी भावी बहू से उनकी क्या अपेक्षाएं हैं? पति तथा ससुराल वाले सभी यह चाहते हैं कि उनकी बहू समाज में एक विशेष जगह बनाये।
कुछ ससुराल वाले समझते हैं कि हर वक्त सजे-धजे रहना उनकी बहू को सोसाइटी में अच्छी जगह दिलाता है। कुछ परिवारों की अपेक्षाएं यह होती हैं कि उनकी बहू शालीनता और विनम्रता के कारण सबके बीच में जानी जाये। कुछ सोचते हैं कि वह फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती हुई सबकी बोलती बंद कर दे तो सोसाइटी में अच्छा नाम होगा।
इन अपेक्षाओं की खबर अपनी बेटी को जरूर दें ताकि वह यह सोच सके कि क्या वह उनकी अपेक्षाओं पर खरी उतर सकती है या नहीं? यदि वह उनकी अपेक्षाएं पूरी कर सके तो परिवार और समाज दोनों ही जगह ज्यादा मान-सम्मान पाएगी और सबका स्नेह भी पा सकेगी।
पूरे परिवार में सास और पति बहू के काफी नजदीक होते हैं। पति के साथ वह फेरे लेकर आती है तो यह जानना और भी जरूरी हो जाता है कि वह क्या चाहता है और आपकी बेटी उसके साथ जीवन-निर्वाह कर पायेगी या नहीं। इसके लिए विवाहपूर्व लड़के लड़की की कुंडली अवश्य मिलवा लें। इसके अलावा उन्हें अलग से आपस में बात करने का मौका भी दें ताकि वे अपनी अपेक्षाएं बता सके और एक-दूसरे की इच्छाएं जान सके। इससे वे समझ पाएंगे कि क्या वे एक-दूसरे के साथ एडजस्ट कर सकते हैं या नहीं?
दूसरे सास बहुत ही महत्त्वपूर्ण हिस्सा है ससुराल का। आपकी बेटी के साथ घर में ज्यादा समय उसको ही बिताना है। यह पहले ही जान लें कि सास का व्यवहार कैसा है एवं वह किस तरह की बहू चाहती है और उससे क्या-क्या अपेक्षाएं रखती हैं। अगर उसका व्यवहार मधुर होगा तो लड़की किसी भी मुश्किल परिस्थिति में संतुलन बना सकती है लेकिन यदि वह ही कठोर होगी तो लड़की क्या सोच-समझ पाएगी? आप अपनी बेटी को ससुराल की विषम परिस्थितियों में भी संभलकर रहने की सलाह दें। उसे कठिनाइयों का सामना करने की आदत बनाने को कहें।
लड़की की शादी के विषय में जल्दबाजी से कोई विचार न करें बल्कि इस मामले में पूरी तरह गंभीर हो जायें। लड़के की उम्र क्या है? वह क्या करता है? कितना कमा लेता है? आपकी लड़की को सही ढंग से रख पाएगा कि नहीं? उसकी आदतें कैसी हैं? उसमें बुरी प्रवृत्तियां तो नहीं हैं? वह भविष्य में क्या कर पाएगा, क्या नहीं? इन सब सवालों के जवाब अवश्य खोजने चाहिए।
सब कुछ सही लगने पर भी यह सोचकर अवश्य देखें कि यदि सब कुछ उल्टा होता चला गया तो आपकी बेटी किस प्रकार उन परिस्थितियों से जूझ सकती है? यह सोचकर भी रखें भले ही आपके सामने सब कुछ सही चलता रहे। लड़की की नौकरी के विषय में पहले ही बातें साफ कर लें। वह नौकरी करेगी या नहीं? नौकरी करना कोई गलत नहीं? वगैरह-वगैरह बातें पहले ही पूछ लें ताकि बाद में आपकी लड़की पर कोई जोर-जबरदस्ती न हो।
उसके भविष्य को किसी भी प्रकार दांव पर न लगने दें। शादी के विषय में गंभीरता से ही काम लें। बेटी की शादी को बोझ न समझें। …………….(उर्वशी)

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2 thoughts on “बोझ न समझें बेटी की शादी को

  • April 27, 2018 at 1:45 pm
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    लड़की जैसे ही युवा हुई कि उसके विषय में चर्चाएं शुरू हो जाती हैं ‘बेटी जवान हो गई है। बस अब इसकी शादी हो जाए। जवानी में कदम रखते ही लड़कियों को यह फुसफुसाहट सुनते-सुनते इसकी आदत हो जाती है।

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