बदल रहे हैं वैवाहिक समारोह के रंग-ढंग

यद्यपि भारतीय संस्कृति में विवाह की गरिमा अक्षुण्ण है लेकिन दो तीन दशकों में सभी क्षेत्रों में मिली उपभोक्तावाद, आधुनिकतावाद

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अपराध में तब्दील होता फैशन

फैशन आधुनिक युग की प्रमुख समस्या है। युगों से इसका प्रचलन चला आ रहा है। कोई भी देश स्वयं को

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जीवन में गतिशीलता बनाए रखने में सहायक है प्यार

शादी होने के थोड़े समय बाद ही प्राय: पति-पत्नी के जीवन में नीरसता आ जाती है। प्यार एक ऐसा खूबसूरत

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सांवले चेहरे को आकर्षक बनायें

सांवला रंग प्रकृति की देन है। फिर भी हमारे आधुनिक कहलाने वाले समाज में यह लड़कियों के लिए एक अभिशाप

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मां बाप द्वारा तलाक के फैसले, बर्बाद होता बच्चों का भविष्य

शादी को एक मनोरंजन और अपने बच्चों को बाजार में बिकने वाली बेजान गुडिय़ा-गुड्डा समझने वाले पत्थर दिल मां बाप

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क्या अंक प्रतिशत ही हो गया है अब शिक्षा का ध्येय

हर कृत्य की एक सीमा होती है। सीमा तक तो वह सुखदायी लगता है किन्तु जब सीमा को छू लेता

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मोदी सरकार आश्वासनों को पूरा करने में फिसड्डी ही साबित हुई

आखिर नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपनी सरकार के चार साल पूरे कर ही लिए। अब उनकी सरकार

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प्रतिदिन मनाइये फादर्स-मदर्स डे

आजकल हमारे देश में बहुत से दिवस मनाए जाने लगे हैं। पहले इनका नाम ही नहीं था किंतु आजकल इनका

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पर्यावरण और औद्योगिक कचरा

विकास का सूचक और अर्थव्यवस्था का आधार बढ़ता मशीनीकरण आज आधुनिक जीवन के हर क्षेत्र को संचालित कर रहा है।

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राष्ट्रवादी विचार से अस्पृश्यता का औचित्य

लोकतंत्र एक विचार, एक दल, एक वंश के अतिरिक्त कुछ और सुनने, मानने, जानने को अस्वीकार करने का नाम नहीं

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